गोरखपुर। ऑटिज्म की बीमारी से ग्रसित बच्चों को शीघ्र पहचान कर उनका इलाज शुरू करने पर बच्चे जल्द स्वस्थ हो जाएंगे। यह एक न्यूरो बायोलाॅजिकल बीमारी है, जिसकी शुरूआत बचपन में होती है। राष्ट्रीय बाल रोग अकादमी बच्चों की इस बीमारी के पूर्ण उपचार के लिए इस साल विशेष अभियान चला रही है। इसी क्रम में सोमवार को बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिंह ने अपने क्लीनिक पर बच्चों की जांच कर उनके अभिभावकों को इसके लिए जागरूक किया।
भारतीय बाल रोग अकादमी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. डीके सिंह ने बताया कि बाल स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर संगठन की तरफ से राष्ट्रव्यापी अभियान आप की बात कम्युनिटी के साथ शुरू की गई है। इस कार्यक्रम में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर पर समूहों को जागरूक एवं सशक्त बनाना है, जिससे बच्चों का भविष्य स्वस्थ और खुशहाल हो।
ये हैं ऑटिज्म के प्रमुख लक्षण
डॉ. डीके सिंह ने बताया कि अपने आप में रहना, आंख मिलाकर बात नहीं करना, नाम पुकारने पर जवाब न देना , उम्र के अनुसार बोलने में देरी, किसी शब्द या कार्य को बार-बार दोहराना, बिना किसी स्पष्ट कारण के ऊल-जलूल हरकतें करना जैसे हंसना, चिल्लाना, रोना आदि, सीखे शब्दों-भाषा को भूल जाना, एक स्थान पर स्थिर न रहना, एकाग्रता का अभाव, मुंह से अत्यधिक लार टपकना, अपनी दिनचर्या में परिवर्तन बर्दाश्त न कर पाना आदि ऑटिज्म के प्रमुख लक्षण हैं। यदि इस बीमारी को शीघ्र पहचान कर ली जाए तो इससे होने वाले मानसिक एवं विकास संबंधित विकारों को काफी हद तक रोका जा सकता है।