गोरखपुर। जिला अस्पताल आए हड्डी के फ्रैक्चर के एक मरीज का केवल इसलिए इलाज नहीं किया गया कि वह एचआईवी संक्रमित है। उसे यहां से बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। वहां इलाज के बाद बीआरडी के नेहरू अस्पताल के आर्थो विभाग ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखकर इसकी सूचना दी। साथ ही यह भी बताया है कि जिला अस्पताल से सामान्य फ्रैक्चर के रोगी भी मेडिकल काॅलेज भेजे जा रहे हैं। जबकि, दोनों जगह समान सुविधाएं हैं। हर महीने जिला अस्पताल से ऐसे चार-पांच रोगी मेडिकल काॅलेज रेफर होकर पहुंचते हैं।
सोमवार को एक युवक जिला अस्पताल से रेफर होकर बीआरडी के आर्थो विभाग में पहुंचा। उसका पैर टूटा है। वहां डाक्टरों ने उसकी जांच कर तत्काल प्लास्टर कराया। डाॅक्टरों का कहना था कि ऐसे रोगियों का उपचार जिला अस्पताल में भी हो सकता है, लेकिन वे एचआईवी संक्रमितों को मेडिकल काॅलेज रेफर कर रहे हैं। नेहरू अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएन शुक्ला ने बताया कि आर्थो विभाग से सूचना मिली कि एक संक्रमित रोगी को जिला अस्पताल से रेफर किया गया है। हम किसी रोगी को मना नहीं कर सकते, उपचार हमारी प्राथमिकता है। जिला अस्पताल प्रबंधन से बात की जाएगी कि रोगी गंभीर हो तो ही रेफर करें। मेडिकोलीगल कराकर रेफर करें।
वहीं जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. राजेंद्र ठाकुर का कहना है कि यह प्रकरण उनके संज्ञान में नहीं है। हड्डी रोग विभाग के डॉक्टर से इसकी जानकारी ली जाएगी। एचआईवी संक्रमित के ऑपरेशन और अन्य विशेष उपचार के लिए जिला अस्पताल में व्यवस्था नहीं है। इसीलिए ऐसे केस मेडिकल कॉलेज को रेफर कर दिए जाते हैं।
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