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President Visit Gorakhnath : 77 साल बाद बना इतिहास, गीता प्रेस में राष्ट्रपति और गोरक्षपीठधीश्वर ने साझा किया मंच

Sun, 05 Jun 2022 04:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजन राय, गोरखपुर

सार

वर्ष 1955 में पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ ने साझा किया था मंच। गीता प्रेस के प्रवेश द्वार और लीला चित्र मंदिर का हुआ था शुभारंभ। 
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गीता प्रेस के कार्यक्रम में राष्ट्रपति... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गीता प्रेस के इतिहास में शनिवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। 77 साल बाद ऐसा अवसर फिर मिला कि गीता प्रेस के आयोजन में देश के राष्ट्रपति और गोरक्षपीठाधीश्वर ने एक साथ मंच साझा किया है। 

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वर्ष 1955 में गीता प्रेस के प्रवेश द्वार और लीला चित्र मंदिर का शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद आए थे। जबकि, गोरक्षपीठाश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दादा गुरू यानी तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ भी मौजूद थे। दोनों ने मंच साझा किया था। शनिवार को भी, पद वही था, लेकिन विभूतियां अलग थीं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ मंच साझा कर रहे थे। इस बात की तस्दीक मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में की। उन्होंने कहा कि यह सुखद अवसर मुझे प्राप्त हुआ है। 

गीता प्रेस के ट्रस्टी बैजनाथ अग्रवाल ने साझा किया है दोनों मंच
खास बात यह है कि गीता प्रेस के ट्रस्टी बैजनाथ अग्रवाल को दोनों मंचों को साझा करने का गौरव हासिल हुआ है। कार्यक्रम के दौरान संचालक ने जब बताया कि गीता प्रेस के ट्रस्टी बैजनाथ अग्रवाल मंच पर मौजूद हैं, आपको 1955 में और आज दोनों मंचों को साझा करने अवसर प्राप्त है। यह सुनते ही पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।  

ऐतिहासिक समारोह के गवाह बने 400 लोग

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मौजूदगी में शनिवार को गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष समारोह के शुभारंभ के साक्षी लगभग 400 लोग बने। राष्ट्रपति मंच पर आए तो सभी ने एक साथ खड़े होकर उन्हें सम्मान दिया। राष्ट्रपति ने भी सभी का अभिवादन किया। गीता प्रेस परिसर राष्ट्रपति के इंतजार में एक दिन पहले से ही सजकर तैयार था। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का गवाह बनने के लिए दोपहर दो बजे से ही अतिथि अपनी सीट ग्रहण करने लगे। सभी अतिथियों को जांच-पड़ताल के बाद ही परिसर में प्रवेश दिया गया। 

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अतिथियों में किया गया ग्रंथों का वितरण
गीता प्रेस प्रबंधन की ओर से आमंत्रित किए गए अतिथियों को पांच धार्मिक और आध्यात्मिक ग्रंथों दिए गए। इनमें ग्रंथों में गीता प्रबोधिनी का विशिष्ट संस्करण, सचित्र श्रीहनुमान चालीसा, कल्याण बोधकथा विशेषांक, शिक्षाप्रद ग्यारह कहानियां और अमृत-बिंदु शामिल थे।

इनकी रही मौजूदगी
मेयर सीताराम जायसवाल, राज्यसभा सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ल, राज्यसभा सदस्य डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल, सांसद गोरखपुर रविकिशन शुक्ल, सांसद बांसगांव कमलेश पासवान, अतुल सर्राफ, उपश्रमायुक्त एके मिश्रा, प्रहलाद गुप्ता, शरद मणि त्रिपाठी, वरुण वैरागी, मदन लाल अग्रहरी सहित तमाम अतिथि कार्यक्रम में मौजूद रहे। 

आरपीएफ बैंड ने बजाई राष्ट्रगान की धुन
समारोह के दौरान राष्ट्रपति के मंच पर आगमन और उनके संबोधन के बाद  राष्ट्रगान हुआ। राष्ट्रगान की धुन को आरपीएफ की बैंड ने बजाई।

बोले अतिथि...
गीता प्रेस का इतिहास हम सभी को गौरव की अनुभूति कराता है। राष्ट्रपति के कार्यक्रम में शामिल होकर गर्व की अनुभूति हो रही है। - चंद्रशेखर सराफ, अतिथि

धार्मिक पुस्तकों के क्षेत्र में गीता प्रेस का विशिष्ट स्थान है। धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन करने वाला ऐसा दुनिया में कोई दूसरा प्रेस नहीं हैं।
-राजीव रंजन, अतिथि

गीता प्रेस की देश ही नहीं दुनिया भर में पहचान है। राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को एक साथ एक कार्यक्रम में देख कर अच्छा लगा।
-राधिका, अतिथि

समारोह में राष्ट्रपति ने महिलाओं के जो सम्मान दिया है, उसके लिए उनकी आभारी हूं। ऐतिहासिक कार्यक्रम का हिस्सा बनकर अच्छा लगा।
-सरला जालान, अतिथि

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