उच्च रक्तचाप से गर्भवतियों को खतरा ज्यादा प्री-एक्लैम्पशिय पर आयोजित हुआ वेबीनार अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। प्रसव के दौरान 10 से 15 फीसदी गर्भवतियों में रक्तचाप अक्सर बढ़ जाता है। पहले गर्भधारण में तो 20 और दूसरे में 15 फीसदी गर्भवतियों में रक्तचाप अनियंत्रित होती है। ऐसे में शरीर में सूजन हो जाता है। इसकी वजह से गर्भवतियों की जान खतरे में आ जाती है। इसमें गर्भस्थ शिशु की मौत हो सकती है। इसे प्री-एक्लैम्पशिय कहते हैं। यह जानकारी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. बबीता शुक्ला ने शुक्रवार को प्री-एक्लैम्पशिय पर आयोजित वेबीनार में कही। बताया कि प्री-एक्लैम्पशिय की स्थिति में रक्त शरीर में रक्त प्रवाह तेज हो जाता है। इसका असर प्रसूता के फेफड़े, गुर्दा, लिवर, प्लेटलेट्स और दिमाग पर पड़ता है। खून के दबाव से गुर्दा और लिवर फेल हो जाता हैं। मरीज को झटका आने लगता है। फेफड़े में पानी भर जाता है। इससे मरीज की मौत हो सकती है। फेडरेशन ऑफ आब्स एंड गायिनी सोसाइटी की पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. साधना गुप्ता ने बताया कि गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप 15 से 20 फीसदी महिलाओं को हो जाता है। इसका समय से इलाज जरूरी है। ऐसे में अगर शरीर में सूजन हो, देखने में परेशानी हो, पेट या सिर में दर्द हो रहा हो तो डॉक्टर से संपर्क करें। कार्यक्रम का आयोजन फॉग्सी की अध्यक्ष डॉ. मधुबाला, सचिव डॉ. मीनाक्षी गुप्ता और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अमृता जयपुरियार ने किया। इस दौरान डॉ. राधा जीना, डॉ. सुनील कमानी, डॉ. दीप्ति चतुर्वेदी मौजूद रहीं।