जीआरपी की टीम ने ट्रेन और प्लेटफाॅर्म पर यात्रियों का सामान चुराने वाले अंतरराज्यीय गैंग के सरगना सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से चार लाख रुपये कीमत का गहना, 11 हजार नकदी और मोबाइल बरामद हुआ। सभी आरोपी बिहार प्रांत के मुजफ्फरपुर और रोहतास जनपदों के मूल निवासी हैं। आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उनको जेल भेज दिया गया।
सोमवार को एसपी रेलवे डॉ. अवधेश सिंह ने प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि बीते दिनों चोरी की चार वारदातें सामने आईं। जांच के दौरान सामने आया कि बिहार का गैंग ट्रेन यात्रियों संग घटनाओं को अंजाम दे रहा है। सर्विंलांस के जरिए पता लगा कि गैंग के मुखिया सहित तीन आरोपी गोरखपुर जंक्शन के प्लेटफाॅर्म नंबर नौ पर मौजूद हैं। जीआरपी इंस्पेक्टर विजय प्रताप सिंह ने टीम के साथ घेराबंदी करके तीनों लोगों को पकड़ा। पूछताछ में उनकी पहचान मुजफ्फरपुर के सरैया थानाक्षेत्र स्थित कोल्हुआ गांव के राहुल मांझी, सुरेश मांझी और रोहतास जिले के अकोढ़ी गोला थानाक्षेत्र में रहने वाले अमेले खरवार के रूप में हुई। उनके पास से चोरी का सामान बरामद हुआ। सरगना राहुल अपनी पत्नी विभा के साथ मिलकर चोरी करता था। उसे कुछ दिन पूर्व पकड़कर पुलिस ने जेल भेजा है। उसने ही सबके बारे में जानकारी दी थी। पुलिस के अनुसार अमेले खरवार, राहुल का साला है।
दिन में बेचते मच्छरदानी, रात में चोरी
जीआरपी के हाथ लगे शातिर चोर पिपराइच क्षेत्र के एक बाग में ठिकाना बनाकर रहते थे। वह दिन में गांव मोहल्लों में जाकर मच्छरदानी बेचते और रात में ट्रेनों में सवार होकर चोरी को अंजाम देते रहे। पुलिस का कहना है कि चोरों की पत्नियां यात्रियों का बैग इत्यादि चुराती हैं। चोरी के समय ट्रेन के टॉयलेट में छिपकर पत्नियों के आने का इंतजार आरोपी करते थे। जैसे ही महिलाएं बैग लेकर आती थीं। उसमें रखे गहने और नकदी निकालकर बैग फेंककर सारा लेकर चोर चले जाते थे। उनके पास बैग नहीं होने से किसी को शक भी नहीं होता था। रात में चोरी करने के बाद दिनभर मच्छरदानी बेचने का काम करते थे।