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गोरखपुर का हिंदी बाजार: सराफा में ऐसा कोई सगा नहीं जिसको तिकड़ी ने ठगा नहीं, ऐसे कमा रहे मोटा मुनाफा

Wed, 21 Jun 2023 01:54 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।

सार

सराफा कारोबारियों और इस तिकड़ी ने शहर के चारों कोनों में विवादित और महंगी जमीनों में करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक लगाया है। तारामंडल से खोराबार के रास्ते में एक जगह 55 से 60 डिस्मिल जमीन, सिक्टौर में चार जमीन, गोलघर, शहर में कई अपार्टमेंट और अन्य जगह इन्होंने अपना व्यापार फैला रखा है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : istock
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विस्तार
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हिंदी बाजार में मोटे सराफा कारोबार के पीछे एक और काला धंधा भी धड़ल्ले से चल रहा है। माफिया श्री प्रकाश ने सराफा कारोबारियों को जमीन और माफिया के गठजोड़ से मोटी कमाई का ऐसा चस्का लगाया कि छूटे नहीं छूट रहा। आज भी सराफा बाजार में माफियाओं से जुड़ी एक तिकड़ी का दबदबा है, जो सराफों का पैसा जमीनों के धंधे में लगवाती है।

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चूंकि, माफिया के खौफ से कोई इनके सौदे में हाथ नहीं डालता, इसलिए मुनाफा तय और सुरक्षित माना जाता है और मोटी रकम लगाई जा रही है। इस मंडली की देखादेखी कई और सराफ भी चोरी छिपे इस राह पर चल पड़े हैं। दिनरात की मेहनत के बावजूद इस मंडली जैसी ताकत और पैसा न कमा पाने वाले सराफ चौंकते तो हैं, मगर मजाल नहीं कि कोई जुबान खोल दे। हां, इतना जरूर है कि डुके-छिपे इस मंडली के लिए कानाफूसी करते हैं -सराफा बाजार में ऐसा इनका कोई सगा नहीं, जिसको इन्होंने ठगा नहीं..।

हिंदी बाजार में जमीनों के धंधे में उतरे सराफा व्यापारियों के तमाम मामले हैं। दरअसल, बाजार में कई सीधे साधे व्यापारियों से इस तिकड़ी ने मोटी रकम जमीनों के धंधे में लगवाकर मुनाफा कमवाया है। मंडली इतनी शातिर है कि जमीनों के धंधों में इनकी रकम लगवाकर दोगुनी करती है, लेकिन मुनाफे को मोटा हिस्सा अपनी जेब में डालकर नाम का मुनाफा इन्हें देती है।
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इसी वजह से है कुछ ही सालों में ये तिकड़ी और इसी तरह से कई सराफ कुछ सालों में कई गुना धनवान और शक्तिशाली दिखने लगे हैं। सराफा कारोबारियों को इस मंडली का ये हुनर पता तो है, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं कि इनके सामने अपनी इच्छा रख सके। क्योंकि, इनके पीछे जिन माफिया का हाथ है , वे उनसे डरते हैं। जमीन के धंधे में इनसे चोट खाए कुछ सराफ बाजार में खुद तो कुछ नहीं बोलते, लेकिन जमीन के धंधे से जुड़े कुछ लोग इनकी हरकतें दूसरों के कानों में डाल ही देते हैं।

पहले करते थे गलाई, आज हैं बड़े कारोबारी

हिंदी बाजार में अवैध सोना और माफिया की मिलीभगत सामान्य बात है। बाजार में कई ऐसे हैं, जिनकी खास पहचान है, वो पहले गलाई और पिरोई का काम करते थे। कच्चा सोना के व्यापार कर ये आज बड़े कारोबारी बन गए। इनके धन भी अवैध सोने के साथ जमीन के कारोबार में लगाए जाने की सूचना है।

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शहर के चारों कोनों में जमीन और संपत्ति
पुलिस तक भी इनकी खबरें हैं। सूत्रों ने बताया कि सराफा कारोबारियों और इस तिकड़ी ने शहर के चारों कोनों में विवादित और महंगी जमीनों में करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक लगाया है। तारामंडल से खोराबार के रास्ते में एक जगह 55 से 60 डिस्मिल जमीन, सिक्टौर में चार जमीन, गोलघर, शहर में कई अपार्टमेंट और अन्य जगह इन्होंने अपना व्यापार फैला रखा है। यह उन्हीं सौदों में हाथ डालते हैं, जिनमें कोई रगड़ा हो और धमक के दम पर कई गुने सीधे होने हों। यही वजह है कि कुछ ही बरसों में विवादित सौदों के जरिए इस मंडली और इन जैसे कुछ और सराफों ने खूब कमाई की है।

 
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मोटी कमाई के बाद राजनीतिक दखल भी हासिल

इस मंडली ने गलाई-पिरोई के धंधे से जमीनों में पैसा लगाकर इतनी मोटी रकम बना ली है कि अब उसे बनाए रखने के लिए राजनीतिक शरण की जरूरत होती है। चूंकि मोटा पैसा जेबों में है, इसलिए हर दल के नेता इनसे दुआ-सलाम करते हैं। दौलत-ताकत के साथ राजनीतिक रसूख देखकर बाकी व्यापारी इनसे खौफ खाते हैं।

इनकी मर्जी के बिना सराफा में कोई बड़ा काम नहीं होता। जिस पर सराफ पर इस मंडली का हाथ होता है, उसी की चलती है। सराफा के धंधे में इतने छेद हैं कि इस मंडली से बैर लेकर कोई अपनी काम बिगाड़ना तो नहीं चाहता, मगर इनकी मनमानी कई बार व्यापारियों को खल जाती है।

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सराफा मंडल अध्यक्ष गणेश वर्मा ने कहा कि हिंदी बाजार का कारोबार पूरी तरह विश्वास का है। यहां कुल 4700 से अधिक छोटे बड़े सोने-चांदी के व्यापारी हैं। प्रशासन या पुलिस जांच करे मगर किसी सीधे-साधे व्यापारी का नुकसान या उत्पीड़न न होने पाए। सभी चाहते हैं कि बाजार में अपराधियों की अगर संलिप्तता है, तो उसे खत्म किया जाए। सराफा मंडल प्रशासन के साथ है। हिंदी बाजार में कई अवैध बिल्डिंग भी है। जीडीए, नगर निगम प्रशासन इनकी जांच कर इन्हें भी दिखवा सकती हैं कि इसमें किसी की मिलीभगत तो नहीं है।



 
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