- डीडीयू के मनोविज्ञान विभाग में दो साल पहले शुरू हुआ था परामर्श केंद्र
- नैक ग्रेडिंग में मिला था काउंसिलिंग सेंटर का लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने दो साल पहले मनोविज्ञान विभाग में स्वस्ति मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र की शुरुआत की थी। इससे नैक ग्रेडिंग में भी विश्वविद्यालय को लाभ मिला, लेकिन अब यह बंद पड़ा हुआ है। लगभग पिछले दो महीने से यहां पर काउंसिलिंग नहीं हो रही है।
विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को तनाव और डिप्रेशन से मुक्ति दिलाने के लिए इस सेंटर की शुरुआत की गई थी। यहां पर दो काउंसलर बैठते थे, लेकिन उन्हें भी काफी समय से फीस नहीं दी गई। बड़ी संख्या में यहां विद्यार्थी आकर अपनी उन समस्याओं को भी काउंसलर से बताते थे जिनकी चर्चा वे अपने घर पर नहीं कर सकते थे। हर शुक्रवार और शनिवार को यहां पर काउंसिलिंग होती थी। लेकिन, पिछले करीब दो माह से बंद होने की वजह से विद्यार्थी आकर लौट रहे हैं। केंद्र पर काउंसिलंग के लिए विद्यार्थियों की फीस भी नहीं लगती थी।
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इंक्यूबेशन सेंटर का काम भी ठप
क्षेत्र में स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में पूर्वांचल इंक्यूबेशन सेंटर की शुरुआत की गई थी। कुछ दिनों तक तो यह ठीक चला। स्टार्टअप आने शुरू भी हो गए थे, लेकिन इसका काम भी अब ठप हो चुका है। महज एक से दो स्टार्ट अप पंजीकृत हैं। इंक्यूबेशन सेंटर ने भी नैक में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की। पिछले छह महीने से यहां भी काम लगभग ठप है। जिम्मेदारों का कहना है कि इसके संचालन में कुछ कागजी समस्या आ रही है, जिसे दूर करने के लिए विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है। जल्द इसके लिए बोर्ड बैठक कर भविष्य की राह तय की जाएगी।
जीरो वेस्ट सेंटर
परिसर में कचरे से खाद बनाने के लिए विश्वविद्यालय में जीरो वेस्ट सेंटर बनाया गया था। विश्वविद्यालय में जितने भी पत्ते गिरते थे उन्हें शाम तक उठा कर सेंटर में खाद बनाई जाती थी। इसमें हर महीने आठ से 10 टन कम्पोस्ट का उत्पादन होता था। नैक में निरीक्षण करने आई टीम ने भी इस सेंटर को देखा था और इसकी प्रशंसा की थी। लेकिन नगर निगम से कचरे के लिए एमओयू होने के बाद यह बंद हो गया है। अब सारा कचरा नगर निगम की गाड़ी उठा ले जाती है।
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कोट...
मनोविज्ञान विभाग के परामर्श केंद्र को जल्द ही शुरू किया जाएगा। छात्र-छात्राओं की काउंसिलिंग यहां जारी रहेगी। इंक्यूबेशन सेंटर में कुछ तकनीकी समस्या है, जिसे जल्द दूर किया जाएगा। विश्वविद्यालय में इन दोनों केंद्रों की जरूरत है।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति