गोरखपुर। मोतीराम अड्डा के पास एक सप्ताह पहले ऑटोरिक्शा पलटने से अपनी दादी के साथ जा रहे दो वर्षीय मासूम का चेहरा बुरी तरह से जख्मी हो गया था। उसे गंभीर हालत में एम्स की इमरजेंसी में लाया गया। एम्स के दंत शल्य विभाग के सहायक आचार्य एवं ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डाॅ. शैलेश कुमार ने दो घंटे तक पीडियाट्रिक मैक्सिलोफेशियल सर्जरी कर बच्चे के टूटे चेहरे को पहले जैसा रूप दिया। एम्स में अब तक के सबसे कम आयु के मरीज के चेहरे की सर्जरी हुई है।
एम्स लाए जाने के बाद बच्चे को पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) में भर्ती किया गया था। पांच दिन बाद हालत में सुधार होने के पर पूर्ण बेहोशी के बाद सर्जरी की गई। डाॅ. शैलेश ने बताया कि वयस्क के तुलना में इतने छोटे शिशु का ऑपरेशन बहुत ही जटिल होता है। कम उम्र और एक्सीडेंट के बाद चेहरे का संरचना बिगड़ने के कारण मरीज में पूर्ण बेहोशी की प्रक्रिया बहुत ही चुनौतीपूर्ण होती है। आमतौर पर छोटे बच्चे की हड्डी टूटने के बजाए मुड़ जाती है, इसे ग्रीन स्टिक (जैसे हरा बांस टूटने की जगह सिर्फ मुड़ता है) फ्रैक्चर कहते हैं। इस केस में पूरा चेहरा टूटकर अंदर धंस गया था। एनेस्थीसिया विभाग के डाॅ. संतोष कुमार शर्मा एवं डाॅ. विज्ञेता वाजपेयी, ट्रामा एवं इमरजेंसी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. सुबोध, सीनियर रेजिडेंट डाॅ. प्रवीण कुमार, जूनियर रेसिडेंट डाॅ. अंकुर और डाॅ. दिव्या ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एम्स निदेशक प्रो. जीके पॉल के डाक्टरों के टीम को बधाई दी। ऑपरेशन के बाद बच्चे की नियमित पीकू वार्ड में डीन एवं बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. महिमा मित्तल एवं एडिशनल प्रोफेसर डाॅ. मनीष कुमार की निगरानी में रखा गया है।