करीब दो माह बाद मंगलवार को चिड़ियाघर दर्शकों के लिए खुल गया। उमस भरी गर्मी के बीच 996 लोग वन्यजीवों को देखने पहुंचे। शेर और बाघ को देखकर बच्चे रोमांचित हो गए। दर्शकों के आने से पहले चिड़ियाघर प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली थीं।
सुबह नौ बजे चिड़ियाघर में प्रवेश शुरू हो गया। पहले दिन दूर-दराज के दर्शक कम आए। टिकट काउंटर के पास बैग चेक करने के बाद ही सभी को अंदर भेजा गया। वन्यजीवों को भी बाड़े में छोड़ा गया लेकिन धूप से बचने के लिए वे छांव में बैठे रहे। शाम के समय बाड़े में उनकी मस्ती देखने को मिली।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में बर्ड फ्लू के चलते सात मई को बाघिन शक्ति की मौत हो गई थी। 12 मई को राष्ट्रीय उच्च पशुरोग संस्थान, भोपाल से आई रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई थी। इसके बाद 13 मई से ही प्राणि उद्यान दर्शकों के लिए बंद रहा।
बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने अन्य वन्यजीवों के स्वास्थ्य की जांच की। उनके नमूने लिए और जांच के लिए भोपाल व बरेली भेजा। इसी बीच बाघ पटौदी की तबीयत खराब हो गई। मुख्य वनाधिकारी के निर्देश पर उसे कानपुर चिड़ियाघर भेजा गया, जहां एक हफ्ते बाद उसकी मौत हो गई। जांच में उसमें भी बर्ड फ्लू का संक्रमण मिला। इसके बाद कानपुर चिड़ियाघर को भी बंद कर दिया गया।
चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि पहले दिन दर्शकों में काफी उत्साह देखने को मिला। उनके आने से पहले सारी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। सामान की जांच करने के बाद ही प्रवेश दिया गया।