गल्ला मंडी में गेहूं की तस्करी करने वाले धंधेबाजों ने नेटवर्क फैला लिया है। बिहार की फर्म के बिल का इस्तेमाल कर डेढ़ फीसदी मंडी शुल्क की चोरी कर रहे हैं। रोजाना 10 से 15 ट्रक गेंहू ऐसे राज्यों में भेजी जाती है जहां मंडी शुल्क नहीं है।
यहां थोकमंडी से कारोबार दिखाते ही नहीं है। एक ट्रक में करीब 10 हजार की चोरी होती है, ऐसे में रोजाना डेढ़ लाख रुपये का नुकसान सरकारी खजाने को भी हो रही है। मंडी सूत्रों की माने तो इस खेल में सबकी मिलीभगत है और ईमानदारी से चढ़ावा भी पहुंच जाता है।
थोक गल्ला मंडी से हो रहे इसे खेल की शिकायत अधिवक्ता शुभेंंद्र सत्यदेव ने सीएम पोर्टल पर भी की है। जानकारी के मुताबिक, बिहार और दिल्ली सहित कई राज्यों में मंडी नहीं है, इस कारण बिहार से उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में गेहूं भेजने पर मंडी शुल्क नहीं है, जबकि गेहूं पर जीएसटी नहीं लगता है।
पड़ोसी राज्य का फायदा उठाते हुए कुछ धंधेबाजों ने बिहार में फर्म का पंजीयन कराया है। वे बिल बिहार का लगाते हैं और गोरखपुर व आसपास के क्षेत्रों से गेहूं की तस्करी कर रहे हैं। एक व्यापारी ने बताया कि बिहार नेटवर्क के वाले धंधेबाज बिहार की फर्म से बिल निकालते हैं और दर्शाते हैं कि ट्रक बिहार से आया है और गोरखपुर से आगे गया, जबकि बिहार से सिर्फ पर्ची आती है और गेहूं गोरखपुर से भेजा जाता है।
गोरखपुर से पश्चिम बंगाल व असम व सिलीगुड़ी में गेहूं भेजा जा रहा है, जहां गेहूं 2660 से 2700 रुपये क्विंटल है। इसी प्रकार बिहार में 2430 रुपये क्विंटल गेहूं की कीमत है। देवरिया और हाटा बाजार सहित अन्य क्षेत्रों में ठिकाना बनाने वाले व्यापारी गोरखपुर से गेहूं खरीदकर सेटिंग से बिहार बार्डर तक पहुंचते हैं और वहां बिहार की पर्ची लगा देते हैं।
व्यापारियों के अनुसार जीपीपीएस, टोल टैक्स और धंधेबाजों के बैंक खातों की जांच की जाए तो यह खेल खुल जाएगा, क्योंकि बिहार के नाम पर बनी फर्म में बैकिंग का सारा लेन देन गोरखपुर में हो रहा है।
वर्ष 2017 में वाणिज्य कर और मंडी शुल्क जमा होने में अंतर पकड़ा गया तो करीब दो करोड़ रुपये की शुल्क चोरी पकड़ी गई थी। गोरखपुर व आसपास के क्षेत्रों में हर दिन 100 ट्रक गेहूं की खरीद फरोख्त हो रही है। एक दिन का कारोबार 5 से 7 करोड़ रुपये है। इसमें कुछ धंधेबाज डेढ़ प्रतिशत मंडी शुल्क की धड़ल्ले से चोरी कर रहे हैं। मंडी में सही तरीके से कारोबार करने वाले व्यापारी काफी परेशान हैं।
एक ट्रक में 30 टन गेहूं लोड किया जाता है। बाजार में 2300 रुपये क्विंटल गेहूं बिक रहा है और एक क्विंटल गेहूं में 35 रुपये की शुल्क की बचत होती है। इस प्रकार एक ट्रक में करीब 10 हजार रुपये की गलत कमाई हो रही है। व्यापारियों के अनुसार हर दिन 15 ट्रक से अधिक गेहूं बिहार वाली फर्मों के बिल पर राज्य से बाहर जा रहा है। इस प्रकार एक दिन में ही तस्कर 150 लाख रुपये राजस्व का चूना लगा रहे हैं।
शुक्रवार को पकड़ी गई गाड़ी, 20,490 रुपये लगा जुर्माना
कृषि उत्पादन मंडी समिति चौरीचौरा की टीम ने शुक्रवार को फुटहवा से पिपराइच रोड पर जाते हुए गेहूं लदे पिकप को पकड़ा तो कागजात सही नहीं मिले। उसी दौरान कारोबारी ने 15 मिनट के अंदर 9 आर स्लीप जारी करा दी, लेकिन अधिकारियों ने नहीं माना। इस मामले में 20,490 रुपये शमन शुल्क वसूला गया। 15 दिन पहले भी गेहूंं मंडी क्षेत्र नई बाजार से एक छोटा ट्रक पकड़ा गया था, जिसमें 27,500 रुपये जुर्माना लगा था।
प्रभारी सचिव, कृषि उत्पादन मंडी समिति, चौरीचौरा अंकुश श्रीवास्तव ने बताया कि मंडी के अंदर ही नहीं बल्कि बाहर भी गेहूंं की जांच की जा रही है। मंडी शुल्क चोरी करने की नीयत से लगाए गए वाहनों को पकड़ा जा रहा है और कार्रवाई भी की जा रही है। व्यापारियों को भी जागरूक किया जा रहा है कि यदि कहीं मंडी शुल्क चोरी की सूचना मिले तो वे बताएं, उनका नाम गोपनीय रखते हुए कार्रवाई की जाएगी।
अधिवक्ता ने की मुख्यमंत्री से शिकायत
दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता शुभेंद्र सत्यदेव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर गेहूं तस्करी की जांच करने की शिकायत की है। उन्होंने मांग की है कि बिहार के नाम पर फर्जी मिल लगाकर गेहूं का धंधा करने वालों की जांच करके कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि इस धंधेबाजों का बड़ा नेटवर्क है। दाल, गेहूं की तरह अन्य सामानों की तस्करी भी बिहार वाली पर्ची के आधार पर की जा रही है। तस्कर बिहार से दिल्ली तक का प्री एरायवल स्लीप लगा देते हैं और माल लादने-उतारने का काम गोरखपुर में होता है।