बीएनएस की धारा का कैलेंडर चिपकाते पुलिसकर्मी, रामगढ़ताल थाने में नई धारा समझते हुए
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आज से बदल जाएंगी हत्या, दुष्कर्म व चोरी सहित कई धाराएं
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860 अब सोमवार से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के नाम से जानी जाएगी। इसमें सिर्फ धाराएं ही नहीं बदलीं, बल्कि सजा और जुर्माने के प्रावधान में भी भारी भरकम बदलाव किया गया है। लोगों की जुबान पर रटीं कुछ धाराएं बदल दी गई हैं।
मसलन, 302 हत्या अब 103 (1), ठगी या धोखाधड़ी 420 अब 118 (4), चोरी 379 अब 303 (2) व दुष्कर्म 376 आईपीसी अब बीएनएस की धारा 64 कहलाएगी। बीएनएस में 175 धाराएं बदल दी गई हैं और 22 धाराएं खत्म हो गई हैं। लिहाजा इससे जानने और समझने में वक्त लगेगा। व्यावहारिक तौर पर कुछ कठिनाइयां आएंगी।
चोरी का जुर्म सिद्ध होने पर नहीं जाएंगे जेल, लगाएंगे झाड़ू
चोरी को लेकर भारतीय न्याय संहिता कानून में बदलाव किया गया है। जो कोई चोरी करेगा और चुराई गई संपत्ति 5 हजार रुपये से कम होगी, साथ ही चोर द्वारा पहली बार चोरी की घटना को अंजाम दिया गया होगा, ऐसी स्थिति में दोष सिद्ध होने पर चोरी की गई संपत्ति वापस करने पर सामुदायिक सेवा से दंडित किए जाने का प्रावधान किया गया है।
इसमें धारा 303(2) में केस दर्ज किया जाएगा। सामुदायिक सेवा के दंड में आरोपी को दो माह के लिए किसी भी इलाके में दो माह तक झाडू या अन्य काम की सजा दी जा सकती है। इसी तरह नशे की हालत में लोक स्थान पर अवचार करने पर, मानहानि के मामले में सामुदायिक सेवा दंड देने का प्रावधान किया गया है।
ई-मेल, व्हाट्सएप से भी करें एफआईआर
भारतीय न्याय संहिता में बदलाव करते हुए इलेक्ट्रानिक कम्युनिकेशन के माध्यम से दी गई सूचना पर भी एफआईआर लिखे जाने का प्रावधान किया गया है। इलेक्ट्रानिक कम्युनिकेशन में व्हाट्सएप, ई-मेल और सीसीटीएनएस पोर्टल शामिल हैं।
इसके जरिए आम जनता घर बैठे एफआईआर लिखवा सकती है। इस माध्यम से एफआईआर लिखवाने के तीन दिन के अंदर पीड़ित को थाने पर पहुंचना होगा। ऐसा नहीं करने पर उसे फेक एफआईआर मान लिया जाएगा।
बीमार सजायाफ्ता की गिरफ्तारी के लिए लेनी होगी अनुमति
छोटे अपराध, जिसमे तीन वर्ष से कम की सजा का प्रावधान है, ऐसे अपराधों में संबंधित व्यक्ति बीमार या 60 वर्ष से अधिक उम्र का है तो उसकी गिरफ्तारी के लिए अधिकारी जो पुलिस उपाधीक्षक से नीचे की पंक्ति का न हो, से अनुमति आवश्यक है।