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Gorakhpur News: फिर बिगड़ी शहर की हवा...बरतें सावधानी वरना हो जाएंगे बीमार

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गोरखपुर। दिवाली के पहले ही शहर की हवा फिर से बिगड़ने लगी है। प्रतिमा विसर्जन-दशहरा और निर्माण कार्यों की वजह ले उड़ रही धूल के अलावा धुएं से भी प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रविवार सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 175 दर्ज किया है, जो सेहत के लिए खतरनाक है। हृदय, सांस और अस्थमा के रोगियों को बहुत ही एहतियात बरतने की जरूरत है, वरना उनकी सेहत बिगड़ सकती है।
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दशहरा के बाद यानी 12 दिसंबर से ही शहर की हवा प्रदूषित होने लगी। प्रतिमा विसर्जन के लिए भारी संख्या में जब गाड़ियां निर्माण वाले क्षेत्रों से गुजरीं तो धूल का गुबार वायुमंडल में उठने लगा। एक्यूआई का स्तर 150 तक पहुंच गया, लेकिन धूप निकलने और हवाओं के चलने से धूल के कण वायुमंडल में ऊपर की तरफ चले गए। बीते दो दिनों से प्रदूषण का स्तर फिर से बढ़ने लगा है।



रविवार की सुबह 11 बजे एक्यूआई का स्तर 175 तक दर्ज किया गया। दिन में हल्की धूप निकती तो थोड़ी राहत मिली। दोपहर एक बजे 170 और शाम चार बजे 166 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसी तरह शनिवार को एक्यूआई का स्तर 154 तक पहुंचा था।
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पेड़ों की कटाई से बढ़ रहा प्रदूषण



गोरखपुर विश्वविद्यालय की सहायक आचार्य डॉ. के सुनीता का कहना है कि वातावरण में नमी के चलते सुबह और शाम को प्रदूषण का स्तर बढ़ा रह रहा है। प्रदूषण हर समय मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होते हैं। प्रदूषण बढ़ने के चलते सांस लेने में दिक्क्त होने लगती है। ऐसे में अस्थमा, एलर्जी और सीओपीडी के मरीज को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। पेड़ों की कटाई, प्लास्टिक और ठोस कचरा का बढ़ता उपयोग व उद्योगों का विस्तार प्रदूषण बढ़ने के पीछे प्रमुख कारण है।







निर्माण कार्य और पराली जलाने से बढ़ा प्रदूषण



मौसम विशेषज्ञ अश्विनी प्रसाद ने बताया कि आसपास के जिलों में धान की कटाई के बाद पराली जलाने का ही मामला प्रकाश में आया है। बरसात में सड़क और ओवरब्रिज समेत अन्य निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहे थे, अब वे तेजी से शुरू हो गए हैं। निर्माण कार्य में तेजी के चलते भी धूल के कण हवा में उड़ रहे हैं। वातावरण में नमी के चलते ये कण वायुमंडल में ऊपर तक नहीं जा पा रहे हैं। इसके चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ा है।





एक्यूआई का मानक



0 से 50 - अच्छा



51 से 100 - संतोषजनक



101 से 200- मध्यम (खराब श्रेणी में)



201 से 300 - खराब



301 से 400 - बहुत खराब



401 से 500- गंभीर







प्रदूषण से बचने को यह करें उपाय



- बुजुर्ग और बीमार सुबह टहलने से परहेज करें।



- प्रदूषण से बचने के लिए घर से निकलते समय मास्क पहनें।



- संभव हो तो शाम को बाजार जाने से बचें, क्योंकि उस वक्त प्रदूषण अधिक होता है।



- जिस इलाके में निर्माण कार्य चल रहा है और धूल अधिक है, उधर जाने से बचें।



वर्जन



प्रदूषण बढ़ने पर सबसे अधिक प्रभाव फेफड़ों के मरीजों पर पड़ता है। ऐसे मरीजों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। घर से बाहर निकलें तो मास्क का प्रयोग करें। सुबह और शाम को टहलने से बचें।
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डॉ अश्वनी मिश्रा, फिजिशियन, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
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