गोरखपुर। नेपाल के पहाड़ों में हुई बारिश की वजह से सरयू और राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। अयोध्या में सरयू ने लाल निशान को पार कर लिया, जबकि यही नदी बरहज में खतरे के निशान से मात्र पांच सेमी नीचे रह गई है। राप्ती नदी अभी खतरे के निशान से काफी नीचे है लेकिन, उसके बढ़ने का क्रम जारी है। इसके अलावा जिले में बहने वाली अन्य नदियाें का जलस्तर बढ़ रहा है। लेकिन, ये खतरे के निशान से काफी नीचे है।
नेपाल और उसके सटे इलाकों में दो दिन पूर्व हुई भारी बारिश की वजह से सरयू नदी में एक बार फिर बाढ़ के हालात हो गए हैं। शारदा बैराज का पानी छोड़े जाने की वजह से सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। सरयू नदी शनिवार को अयोध्या में खतरे के निशान से 10 सेमी ऊपर पहुंच गई है। उसके बढ़ने का क्रम जारी है। यह नदी अयोध्या होते हुए जिले में प्रवेश करती है और देवरिया के बरहज होते बलिया स्थित गंगा नदी में जाकर मिलती है। बरहज में सरयू नदी खतरे के निशान से 15 सेमी ऊपर बहने लगी है।
दूसरी तरफ जिले में बहने वाली राप्ती नदी खतरे के निशान से 1.88 मीटर नीचे बह रही है। लेकिन, वह लगातार बढ़ रही है। नदी के ऊपरी हिस्से जहां से निकली है उसके शुरुआती स्थलों पर नदी खतरे के निशान को पार कर गई है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यहां भी इसका जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। इसके अलावा अन्य भी नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे हैं। लेकिन, उनका पानी बढ़ रहा है।
चिल्लूपार प्रतिनिधि के अनुसार, सरयू की उफनती लहरें बगहा देवार गांव के हुकुमचंद और जितेन्द्र कुमार के घर की दीवार से सीधे टकरा रही हैं। नदी के उग्र रुख से गांव के प्राथमिक विद्यालय पर खतरा बना हुआ है। उधर, जलस्तर में वृद्धि होने से तटवर्ती क्षेत्रों में हो रही कटान में कमी आई है, लेकिन बगहा में अब भी रुककर कटान होने से तटवर्ती लोगों में भय व्याप्त है। जलस्तर बढ़ने से अब सरयू नदी की उग्र लहरें बगहा गांव के प्राथमिक विद्यालय पर सीधे टकराएंगी। आबादी क्षेत्र में लहरें टकराने के साथ ही नदी तेजी से बैकरोलिंग भी कर रही है, जिससे बाढ़ बचाव कार्य में लगाए गए सैकड़ों बंबू क्रेट कटर, 24 परक्यूपाइन, जीओ बैग कटर, झांवा भरी बोरियों के खिसकने और कटान का खतरा बढ़ता जा रहा है।
उधर, राप्ती नदी पर बने कोठा-नवलपुर तटबंध, खुटभार-कंसासुर रिंग बांध, गरयाकोल रिंग बंधे से होकर नदी प्रवाहित हो रही। इससे बांधों पर दबाव बढ़ गया है। जबकि, बांधों के नीचे धान और सब्जियों की फसल बाढ़ के पानी में डूब जाने से किसान लागत मूल्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे है। वहीं, तटवर्ती कछार और दियारा के गांवों में पानी घुसने के डर से ग्रामीण भयभीत है।