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कुर्बानी से बढ़ती है भाईचारगी: मुफ्तिया गाजिया खानम

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गोरखपुर। मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में रविवार को महिलाओं की महाना दीनी महफिल ''''बज्मे कनीजाने आयशा'''' आयोजित हुई। कार्यक्रम की शुरुआत शिफा खातून ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत कर की। हम्द कनीज फातिमा व नात मुस्कान परवीन, तस्मी खातून, सना खातून ने पेश की। शिफा, फिजा खातून, नूर सबा कनीज ने नज्म पेश की। अल्बिया खान व मरियम खान ने दीनी सवाल-जवाब पेश किए। अध्यक्षता नूरजहां शरीफी व अंजुम आरा ने की।
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मुख्य वक्ता मुफ्तिया गाजिया खानम अमजदी ने कहा कि ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर नमाज पढ़ने के साथ-साथ जानवरों की कुर्बानी देने की भी रवाज है। इस्लाम के अनुसार कुर्बानी करना हजरत इब्राहीम की सुन्नत है, जिसे अल्लाह ने मुसलमानों पर वाजिब करार दिया है।
संचालन करते हुए सादिया नूर व नूर फातिमा ने कहा कि जिलहिज्जा माह की 10 तारीख को ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर्व मनाया जाता है। पर्व के मौके पर मुस्लिम समाज द्वारा लगातार तीन दिन तक कुर्बानी की जाती है। जिलहिज्जा माह में ही देश व दुनिया के लाखों मुसलमान हज अदा करते हैं। भारत से भी बड़ी संख्या में हज यात्री मक्का व मदीना शरीफ पहुंचे हुए हैं।
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अंत में दरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में खुशहाली, तरक्की व अमन की दुआ की गई। शीरीनी बांटी गई। इस मौके पर ज्या वारसी, हिना खातून, अदीबा फातिमा, किताबुन्निसा, यास्मीन खातून, उमरा खातून, माहिरा खातून आदि मौजूद रहीं।
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