गोरखपुर। भारत सरकार के विभिन्न विभागों में संयुक्त सचिव, निदेशक एवं उप सचिव स्तर के 45 पदों पर भर्ती के लिए यूपीएससी ने आवेदन आमंत्रित किया है। इस विज्ञापन में आरक्षण का उल्लेख नहीं है। मजे की बात यह है कि केन्द्र सरकार के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इन पदों के लिए आवेदन करने से डिबार किया गया है। इन उच्च पदों पर सीधी भर्ती को लेटरल इंट्री का नाम दिया गया है, जो आरक्षण के सिद्धान्त का उल्लंघन तो करती ही है, केंद्र के सीधी भर्ती एवं पदोन्नति नियमावली का भी उल्लंघन करती है।
यह कहना है पूर्व आयकर आयुक्त डॉ.रामसमुझ का। उन्होंने कहा कि यह भाजपा सरकार द्वारा प्रतिपादित नया फार्मूला है, जिसका सैद्धान्तिक उद्देश्य है कि विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ जो आल इण्डिया एवं सेन्ट्रल सर्विसेस में चयनित नहीं हो पाये, उन्हें इन उच्च पदों पर सीधी भर्ती कर उनकी योग्यता का लाभ उठाया जाए। इसमें 45 पदों पर भर्ती करने के लिए विज्ञापन निकाला गया है। उनका मानना है कि दोबारा सीधी भर्ती करने से पहले भारत सरकार को एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए था कि पूर्व में 57 पदों पर की गई सीधी भर्ती का क्या परिणाम रहा? क्या ये लोग आईएएस, आईएफएस या अन्य सेन्ट्रल सर्विसेस के पदोन्नत लोगों से बेहतर परिणाम दे रहे हैं? यदि हां, तो कैसे, इसका डाटा सहित उल्लेख होना चाहिए। संवाद