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रेलवे अस्पताल: इंजेक्शन कर गई रिएक्शन, सैंपल जांच को भेजा

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गोरखपुर। रेलवे अस्पताल में भर्ती एक मरीज को मोनोसेफ सेफ्ट्रियाक्जोन इंजेक्शन लगने के बाद घबराहट और उल्टी होने लगी। मरीजों की तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर ने उसे गहन रोगी कक्ष में भर्ती कर इलाज शुरू किया। कुछ और मरीजों में भी इस तरह की दिक्कत होने पर कई मरीजों को अस्पताल से बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। कुछ को जबरन डिस्चार्ज करने की भी चर्चा है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि केवल एक मरीज को दिक्कत हुई थी और उसकी स्थिति भी इलाज के बाद ठीक है। फिलहाल जिस बैच की इंजेक्शन का रिएक्शन हुआ था, उसके उपयोग पर रोक लगाते हुए सैंपल जांच के लिए भेजा गया है।
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रेलवे के कर्मचारी मनीष 19 सितंबर को रेलवे अस्पताल इलाज कराने गए थे। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मनीष को मोनोसेफ सेफ्ट्रियाक्जोन इंजेक्शन लगाया गया। इसके कुछ देर बाद ही उसे घबराहट और उल्टी होने लगी। उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और वह चिल्लाने लगे। परिजन पहुंचे तो चिकित्सकों को आईसीयू वार्ड में भर्ती करा दिया। दो दिन गहन चिकित्सा निगरानी में रखने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मनीष को ठीक बताकर डिस्चार्ज कर दिया। जबकि मनीष का कहना है कि उसकी हालत अभी ठीक नहीं है। चर्चा है कि जिस बैच का इंजेक्शन मनीष को लगा था, उसमें से ही अन्य इंजेक्शन दूसरे मरीजों को भी लगाने पर दिक्कत हुई।
इस संबंध में पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह का कहना है कि एक मरीज की शिकायत मिली है। जिस बैच के इंजेक्शन से दिक्कत है, उसका उपयोग बंद कर दिया गया है। इंजेक्शन का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है।
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