गोरखपुर। बांसगांव के भैंसा रानी गांव में डेढ़ साल के दिव्यांश की ईंट से कूचकर निर्मम हत्या के आरोपी रंजीत को जेल की मिलेनियम बैरक में रखा गया है। यहां वह चार दिनों से एक कोने में पड़ा हुआ है। कभी वह बड़बड़ाने लगता है तो कभी गुमसुम हो जाता है। अभी तक उसने किसी भी बंदी से बातचीत नहीं की है। बंदी भी उसकी अजीब हरकतें देख हैरान हैं। जेल प्रशासन की नजर उसकी ही गतिविधियों पर है। बहुत जल्द उसकी मानसिक जांच कराई जाएगी। जांच में मानसिक बीमारी साबित होने पर उसे वाराणसी के मानसिक अस्पताल भेजा जा सकता है।
हरपुर-बुदहट पुलिस ने मंगलवार को उसे जेल भिजवाया था। पुलिस के सामने इधर-उधर की बातें कहकर वह बार-बार गलती होने की बात स्वीकार करता रहा। थाना प्रभारी, सीओ और एसपी की पूछताछ में उसने बच्चे को मारने की वजह नहीं बताई। जेल जाने पर भी वह गुमसुम रह रहा है, अजीब-अजीब सी बातें करता है। सूत्रों की मानें तो पहले दिन जेल प्रशासन भी उसकी करतूत से अंजान था। बुधवार को जानकारी होने पर बंदी रक्षक सतर्क हो गए।
जेल के हर बैरक में कैमरे लगे हुए हैं, जिनके जरिए खास तौर से रंजीत पर नजर रखी जा रही है। अन्य बंदियों को भी उससे दूरी बनाकर रहने के लिए कहा गया है। जेलर अरुण कुमार का कहना है कि अभी तक की निगरानी में वह मानसिक रोगी लग रहा है। डॉक्टर की जांच में मानसिक रोग की पुष्टि होने पर उसे अन्य बंदियों से अलग रखा जाएगा। इसके बाद वाराणसी भेजने के लिए पत्राचार किया जाएगा। वाराणसी के मानसिक अस्पताल में मानसिक बीमार बंदियों को रखकर इलाज किया जाता है।
यह थी घटना
बीते सोमवार को बांसगांव के भैंसा रानी गांव में डेढ़ साल के एक दिव्यांश की रंजीत ने ईंट से कूंचकर निर्मम हत्या कर दी थी। बच्चा घर से कुछ दूरी पर खेल रहा था। इस बीच आरोपी आया और उसे गोद में लेकर उसके सिर पर ईंट बरसाने लगा। घायल बच्चे की बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में ही मौत हो गई। मंगलवार को रंजीत को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भिजवा दिया। पुलिस का कहना है कि रंजीत की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।
असफलता-एकाकीपन भी करवाता है सनकी रंजीत जैसी हरकतें
एक्यूट साइको सिंड्रोमः विशेषज्ञों के मुताबिक मासूम हत्याकांड के आरोपी के ऐसे ही लक्षण
इस सिंड्रोम में सामान्य दिखने वाला व्यक्ति 24 से 48 घंटे में सामान्य से हो जाता है हिंसक
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। असफलता और एकाकीपन से व्यक्ति में मानसिक विकृति पनपती है। व्यक्ति को समाज में सबसे डर लगने लगता है। डर को दूर करने के लिए सबसे पहले उसके सामने जो पड़ता है, उस पर हमलावर हो जाता है। यह एक मनोरोग है, जिसे एक्यूट साइको सिंड्रोम कहते हैं। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अक्सर पड़ोसी या परिचित लोगों के साथ ही असामान्य या हिंसक हरकतें कर बैठता है और फिर जब वह सामान्य स्थिति में आता है तो पछताता भी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बांसगांव में मासूम की हत्या करने वाले आरोपी में भी इस तरह के रोग के लक्षण हैं। ऐसे मरीज को काउंसिलिंग और इलाज से ठीक किया जा सकता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ तापस कुमार आईच कहते हैं- एक्यूट साइको सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है, जो व्यक्ति में धीरे-धीरे पनपती है। मरीज असामान्य हरकतें करने लगता है। 24 से 48 घंटे में मनोरोगी की हरकतें बदल जाती हैं। सोचने-समझने की शक्ति शून्य हो जाती है। बांसगांव में मासूम हत्याकांड में भी आरोपी अपने घर से निकला होगा तो उसके सामने बच्चा पड़ गया होगा। उसे बच्चे से ही डर लगने लगा होगा और फिर उसने हमला कर दिया होगा।
डॉ तापस का कहना है कि व्यक्ति जब अकेला होता है और निराशा, कुंठा बनकर उसे परेशान करती है तो वह विचलित होने लगता है। असामान्य लक्षण दिखते ही काउंसिलिंग बहुत आवश्यक है। वरना वह बड़ी वारदात कर बैठता है।