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पराग डेयरी : दशकों से जुड़े दुग्ध उत्पादक किसानों की छिन गई रोजी रोटी

Mon, 14 Oct 2024 05:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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गीडा(गोरखपुर)। घाटे में चल रही पराग डेयरी विभागीय उदासीनता के कारण 18 माह से बंद है। इससे दशकों से दूध व्यवसाय से जुड़े किसानों की रोजी रोटी छिन गई। 30 अगस्त 2024 को दिल्ली में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह और नेशनल डेयरी फेडरेशन के चेयरमैन मिनेश शाह ने एक बैठक में पराग डेयरी को लीज पर देने का निर्णय लिया। पराग प्लांट की बंद पड़ी मशीनों को देखने 11 अक्तूबर को पांच सदस्यीय टीम आई थी। प्लांट को दिसंबर माह में लीज पर देने की चर्चा चल रही है। सब कुछ ठीक रहा तो प्लांट को दिसंबर माह में लीज पर दे दिया जाएगा। शासन के इस निर्णय से दुग्ध उत्पादक पशु पालक मायूस है।
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1967 में 20 हजार लीटर प्रतिदिन खपत क्षमता वाली पराग डेयरी प्लांट का निर्माण हुआ था। क्षेत्र के दुग्ध उत्पादक किसान अपने दूध को डेयरी में बेचकर परिवार का भरण पोषण करने लगे। शासन की ओर से दूध उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने के लिए करोड़ों की लागत से एक लाख लीटर दूध प्रतिदिन खपत क्षमता वाली पराग डेयरी का नया प्लांट बनाया। 2019 में यह बनकर तैयार हो गया। जानकारों की मानें तो नए प्लांट को चलाने के लिए प्रतिदिन एक लाख लीटर दूध की व्यवस्था करने के लिए 11 अप्रैल 2019 को तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक ने अयोध्या में मेसर्स आईडीएमसी के अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें निर्देश दिए कि पराग डेयरी के नए प्लांट को सुचारू रूप से चलाने के लिए गोंडा, फैजाबाद और अयोध्या दुग्ध संघ प्रतिदिन 40 से 50 हजार लीटर दूध पराग डेयरी को देगा। निर्देश के अनुपालन में बस्ती दुग्ध संघ 10 से 15 हजार लीटर दूध प्रतिदिन भेजने लगा, लेकिन गोंडा और फैजाबाद ने इस पर अमल नहीं किया। इससे नया प्लांट शुरू होने के पूर्व ही एक सुनियोजित षड्यंत्र का शिकार हो गया और इस पर खतरे के बादल मंडराने लगे।
20 हजार लीटर दूध प्रतिदिन खपत क्षमता वाले पुराने प्लांट में कभी भी 10 से 12 हजार लीटर से अधिक दूध की व्यवस्था नहीं हो पाती थी। नए प्लांट को कम दूध पर चलाने में आय की अपेक्षा व्यय ज्यादा होने लगा। इससे प्लांट पर किसानों और कर्मचारियों का बकाया बढ़ता गया। बकाए के कारण किसानों ने दूध की आपूर्ति कम कर दी, जिससे देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर और गोरखपुर से प्रतिदिन 20 से 25 हजार लीटर दूध की होने वाली आपूर्ति घटकर 700 से 1000 लीटर तक पहुंच गई।
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एक जून 2023 तक पराग डेयरी पर किसानों, कर्मचारियों और अन्य का करीब 6.25 करोड़ रुपया का बकाया हो गया। उस समय गोंडा डेयरी के जीएम इंदु भूषण सिंह को पराग डेयरी के जीएम का भी चार्ज मिला था। वह गोरखपुर डेयरी में बहुत कम आते थे, इससे प्लांट के कर्मचारियों में कार्य के प्रति उदासीनता बढ़ती गई और उत्पाद घटता चला गया। इसके कारण पराग डेयरी प्लांट में एक जून 2023 को ताला लग गया। ताला बंदी के बारे में जानकारी देने पर 21 जून 2023 को पशुपालन एवं दुग्ध विकास मंत्री ने एक बयान में कहा था कि डेयरी प्लांट किसी भी हाल में बंद नहीं होने दिया जाएगा। प्लांट के बद हो जाने पर गोरखपुर मंडल के चारों जिले के पंजीकृत और प्रस्तावित करीब 900 दुग्ध सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने कई दिन तक विरोध प्रदर्शन किया। नाराज किसानों ने 22 जून 2023 को पराग डेयरी परिसर में कारखाना प्रबंधक बद्री सिंह बोरा, डेयरी के चेयरमैन रणजीत सिंह सहित कई अधिकारियों को घंटों बंधक बनाकर रखा। किसानों के विरोध को देखते हुए जीएम इंदुभूषण सिंह को हटाकर रेनू कुमारी को जीएम का प्रभार दिया गया। किसानों को उनसे दूध खरीदने का आश्वासन दिया गया। शर्त यह रखी गई कि यहां का दूध अयोध्या डेयरी को जाएगा और वहां से घी-पनीर, दूध पैकिंग आदि तैयार कर गोरखपुर के उपभोक्ताओं में वितरण किया जाएगा। यह सिलसिला कुछ समय तक चला। लेकिन अयोध्या डेयरी ने उधार देना बंद कर दिया, जिससे यहां आए दिन आपूर्ति ठप होने लगी।
30 अगस्त 2024 को दिल्ली में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह और नेशनल डेयरी फेडरेशन के चेयरमैन मिनेश शाह ने एक बैठक में पराग डेयरी को लीज पर देने का निर्णय लिया। पराग प्लांट की बंद पड़ी मशीनों को देखने 11 अक्तूबर को पांच सदस्यीय टीम आई थी। प्लांट को दिसंबर माह में लीज पर देने की चर्चा चल रही है।
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वर्जन
इस प्लांट को नेशनल डेयरी फेडरेशन को लीज पर देने की चर्चा चल रही है। इसे देखने के लिए 11 अक्तूबर को पांच सदस्यीय टीम आई थी।
रेनू कुमारी, जीएम, पराग डेयरी
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