गोरखपुर। डोमिनगढ़ रेलवे स्टेशन पर आरआरई पैनल बदलने का काम 19 सितंबर से शुरू होने की संभावना है। इसके साथ ही डोमिनगढ़ से जगतबेला के बीच ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम भी लगाया जाएगा। इन दोनों काम को पूरा करने में करीब 12 दिन का समय लगेगा। इस कार्य के लिए गोरखपुर-गोंडा मेन रूट पर मेगा ब्लॉक लेना होगा, जिसके लिए प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। मंजूरी मिलने की उम्मीद में इंजीनियरिंग और सिग्नल विभाग ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
गोरखपुर-बस्ती के बीच ऑटाेमेटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम का काम तेजी से चल रहा है। जगतबेला से चुरेब तक यह सिस्टम एक्टीवेट भी हो चुका है। अब जगतबेला से डोमिनगढ़ के बीच इसे इंस्टाल किया जाना है। इसके लिए इंटरलाॅकिंग का काम होना है। इसके अलावा डोमिनगढ़ स्टेशन पर सिग्नल के लिए आरआरई पैनल की जगह इलेक्ट्रॉनिक पैनल लगाया जाना है। इससे स्टेशन मास्टर कंट्रोल रूम में बैठकर कंप्यूटर और माउस के जरिये ही सभी लाइनों पर सिग्नल को अपडेट कर सकेंगे।
इन दोनों कार्य के लिए पहले 09 सितंबर से प्री इंटरलॉकिंग और 12 सितंबर से इंटरलाॅकिंग का कार्य प्रस्तावित था, लेकिन बोर्ड से इसकी मंजूरी नहीं मिली। अब नया प्रस्ताव 19 सितंबर से भेजा गया है। बताया जा रहा है कि यह कार्य पूरा होने में 12 दिन का समय लगेगा, जिसमें दो दिन सिग्नल विभाग और 10 दिन इंजीनियरिंग विभाग को चाहिए।
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अभी मंजूरी नहीं मिली तो फिर दिसंबर में होगा काम
ऑपरेटिंग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अगर सितंबर में डोमिनगढ़ की एनआई का काम नहीं कराया जा सका तो फिर काम कम से कम दो माह प्रभावित होगा। क्योंकि अक्तूबर-नवंबर में गोरखपुर से होकर करीब 40 जोड़ी फेस्टिवल स्पेशल और 160 रूटीन की ट्रेनें होंगी। इसके साथ ही 40 माल गाड़ियों का भी संचालन होना है। इस तरह पीक मंथ में हर दिन करीब 200 ट्रेन व 40 माल गाड़ियों का संचालन रोकना आसान नहीं होगा। दिसंबर में जब कोहरे के चलते स्वत: ही ट्रेनें कैंसल करनी पड़ती हैं, उस वक्त ही डोमिनगढ़ से लेकर गोरखपुर यार्ड तक का काम कराया सकता है। हालांकि तब काम का दबाव बहुत अधिक हो जाएगा। क्योंकि गोरखपुर यार्ड इस रूट का सबसे लंबा यार्ड है, और यहां से जाने वाली ट्रेनों के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग भी नहीं है।