रेलवे स्टेशन के पास सिंचाई विभाग की जमीन पर बनने वाला नया मंडलीय कार्यालय आधुनिकता के साथ-साथ गोरखपुर और आसपास के गौरवशाली अतीत को भी बताएगा। बेसमेंट समेत सात मंजिला भवन के प्रवेश द्वार पर बाबा गोरखनाथ की मूर्ति लगेगी। भवन के मुख्य भाग पर गीता प्रेस, बुद्ध और कबीर से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों के चित्र भी उकेरे जाएंगे।
बेसमेंट में 851 गाड़ियों के पार्किंग व ग्राउंड फ्लोर पर कैंटीन की सुविधा होगी। इसके परिसर में औषधीय पौधे भी लगाए जाएंगे। शहर के विकास के साथ ही वर्तमान कमिश्नर कार्यालय को भी नई जगह पर बनाने का प्रस्ताव है। इसके लिए रेलवे स्टेशन रोड पर सिंचाई विभाग की करीब 13 एकड़ खाली जमीन को चिह्नित किया गया है।
इस एकीकृत नए कार्यालय भवन के निर्माण कार्य के लिए 316.23 करोड़ रुपये की प्रशासनिक व वित्तीय सहमति मिल चुकी है। इसके सापेक्ष 20 करोड़ रुपये भी जारी हो चुके हैं। नए भवन में कमिश्नर समेत कुल 72 विभागों के मंडलस्तरीय अधिकारियाें और कर्मचारियों को जगह मिलेगी। इसमें 1489 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी।
ईंट की जगह होगा एएसी ब्लॉक का उपयोग
इस नई बिल्डिंग की खासियत यह होगी कि इसमें ईंट की जगह सीमेंट व बालू से बने एएसी ब्लॉक (ऑटो क्लेव्ड एरेटेड कंक्रीट) का उपयोग होगा। ईंट की अपेक्षा वजन में हल्के इन कंक्रीट ब्लॉक से चिनाई भी आसान होती है।
इसके अलावा इससे बन घरों को ठंडा करने के लिए ईंट से बने घरों की अपेक्षा कम बिजली की खपत होती है। इतना ही नहीं, नए भवन में बिजली उत्पादन के लिए सोलर प्लांट, जल शोधन के लिए संयत्र के अलावा दूषित जल शोधन के लिए एसटीपी भी लगाई जाएगी।
धन जुटाने के लिए बेची जाएंगी बेकार जमीनें
नए एकीकृत मंडलीय कार्यालय के निर्माण पर खर्च होने वाली 316 करोड़ 26 लाख रुपये की धनराशि में से प्रदेश सरकार केवल 50 करोड़ रुपये ही देगी। शेष रुपये खाली हो रहे पुराने भवनों की जमीन बेचकर जुटाई जाएगी। इसके बाद भी अगर धन कम पड़ेगा तो जीडीए अपने अन्य स्रोतों से इसकी व्यवस्था करेगा। इसके लिए जमीनों की भू-उपयोगिता भी बदली जा सकेगी।
नए एकीकृत मंडलीय दफ्तर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि सभी विभाग एक ही भवन में आ जाएं। इससे अपने काम के लिए दूसरे जिलों से गोरखपुर आने वालों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। निर्माण के लिए 20 करोड़ प्रदेश सरकार ने दे दिया है। प्रस्तावित 316 करोड़ में से जीडीए को करीब 266 करोड़ का प्रबंध भूमि मुद्रीकरण और अन्य साधनों से जुटाना है:
आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए