गोरखपुर। बिहार के सिवान जिले का गिरोह स्टांप के साथ ही जाली नोट भी छापता था। बुधवार को रिमांड पर लिए गए गिरोह के मास्टरमाइंड नवाब आरजू की निशानदेही पर पुलिस ने 200 के चार जाली नोट, प्रिंटर व लैपटाप बरामद किए। पूछताछ व जांच में पता चला कि फिरोजाबाद के रहने वाले अर्पित जैन के जरिए नवाब आरजू, उसके पिता व भांजे ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गिरोह का विस्तार किया था। अर्पित को गिरफ्तार करने का प्रयास कैंट थाना पुलिस व एटीएस ने तेज कर दिया है।
यूपी एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) ने फर्जी स्टांप छापकर बेचने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड नवाब आरजू व उसके साथी राजू यादव को एक सितंबर की सुबह रेलवे स्टेशन रोड से गिरफ्तार किया था। बिहार के सिवान जिले के रहने वाले आरोपियों के विरुद्ध गोरखपुर पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इनके कब्जे से 6.72 लाख रुपये के फर्जी स्टांप व 72 हजार रुपये के डाक टिकट, तीन मोबाइल फोन व एक क्रेटा गाड़ी मिली थी। पूछताछ में पता चला था कि नवाब आरजू जाली नोट भी छापता है, लेकिन उसके कब्जे से कुछ नहीं मिला। एटीएस के निरीक्षक विजय प्रताप सिंह की तहरीर पर केस दर्ज कर दोनों आरोपियों को जेल भेजवा दिया गया।
केस की विवेचना कर रहे कैंट थाने के एसएसआई ने आरोपी की कस्टडी रिमांड के लिए न्यायालय में अर्जी दी थी। जिस पर विचार करते हुए मजिस्ट्रेट ने बुधवार को सुबह सात से रात 10 बजे तक के लिए नवाब आरजू की कस्टडी रिमांड मंजूर की थी। कैंट पुलिस ने पूछताछ की तो उसने बताया कि सिवान के मैरवा में रहने वाली बहन के घर पर जाली नोट, प्रिंटर व लैपटाप रखा है। जिसे पत्नी के जरिए उसने गोरखपुर रेलवे स्टेशन के गेट नंबर सात के पास फेंकवा दिया। नवाब आरजू को लेकर पुलिस गेट नंबर सात के पास पहुंची तो झाड़ी में पड़े बैग से लैपटाप, प्रिंटर के साथ ही 200 रुपये के चार जाली नोट मिले। पूछताछ के बाद रात आठ बजे कैंट थाना पुलिस ने नवाब आरजू को जिला कारागार में दाखिल कर दिया।