नगर निगम में कर निर्धारण सूची को लेकर एक अलग मामला आया है। इसमें एक ही मकान के दो नंबर आवंटित हो गए हैं। ये कैसे हो गया इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। शिकायत के बाद नगर आयुक्त ने इसमें जांच के निर्देश दिए हैं लेकिन इससे जुड़े रिकॉर्ड ही गायब हैं।
बशारतपुर खरैया पोखरा निवासी गोविंद विश्वकर्मा ने नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल को पत्र देकर बताया कि उनका मकान पिता दिवंगत रामप्यारे के नाम से है। उनकी मौत के बाद दोनों भाइयों का नाम कर निर्धारण सूची में दर्ज होना था लेकिन भतीजे ने किसी तरह अपने नाम से एक नया मकान नंबर आवंटित करवा लिया। जबकि, उसके पहले भाई का नहीं हुआ है। अब पुराने मकान नंबर का संपत्ति कर भुगतान के लिए उनके पास नोटिस आया है।
गोविंद का आरोप है कि सूची में नाम दर्ज करवाने से पहले उनको नोटिस भी नहीं मिली थी। साथ ही एक मकान का यदि बंटवारा होता है तो उसी नंबर से जुड़ा नया नंबर आवंटित होता है। लेकिन इस केस में अलग मकान नंबर मिला है। कर अधीक्षक से बात करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
निगम की ओर से बताया जा रहा है कि इसका रिकॉर्ड नहीं मिल रहा। निगम सूत्रों के अनुसार कर निर्धारण सूची में ये बदलाव 2016 में हुआ है। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के निर्देश के बाद इसमें जांच चल रही है।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय राय ने बताया कि प्रकरण की जांच की जा रही है कि पहले ये कैसे नाम दर्ज हो गया। पुराने सारे रिकॉर्ड देखे जा रहे हैं। बहुत जल्द इसका निस्तारण कर दिया जाएगा।