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Gorakhpur News: सहज के लिए वात्सल्य और धर्म विरोधियों के लिए वज्र जैसे कठोर थे महंत अवेद्यनाथ

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गोरखपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ के साथ सेवा के अनेक प्रकल्पों से जुड़कर काम करने का सौभाग्य उन्हें मिला। उनमें वात्सल्य भाव था। वह मार्गदर्शक और सच्चे समाज सुधारक थे। सहज और सरल लोगों के लिए वह वात्सल्य स्वरूप थे तो धर्म विरोधी आचरण करने वालों की प्रति वज्र जैसे कठोर भी थे।
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मुख्यमंत्री शनिवार को गोरखनाथ मंदिर में महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संत परंपरा सामाजिक एकजुटता की पोषक है। गुरु गोरखनाथ से लेकर आदि शंकर, स्वामी रामानंद, स्वामी रामानुजाचार्य सबके संदेश का प्राथमिक भाव यही है।



मुख्यमंत्री ने अपने दादागुरु महंत दिग्विजयनाथ और गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ का स्मरण करते हुए कहा कि महंतद्वय ने जो कहा, वह करके भी दिखाया। जो बोला, वह किया और जो किया वही बोला। दोनों गुरुजनों ने सामाजिक एकता के लिए समरसता के अभियान को नई ऊंचाई दी। शिक्षा, चिकित्सा और सेवा के अनेक प्रकल्पों को आगे बढ़ाया। गोसेवा और गोरक्षा के संकल्प को पूर्णता की राह दिखाई।
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सीएम ने कहा कि महंतद्वय के लिए कोई कार्य सिर्फ उपदेश नहीं था, बल्कि वह उसे करके दिखाते थे। वास्तव में किसी बात का वजन तभी होगा, जब हम उसे खुद आचरण में उतारेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरे भाषण से नहीं आचरण परिवर्तन से बदलाव आता है। मुख्यमंत्री एवं मंचासीन अतिथियों ने महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय जंगल भूषण द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिका ‘विमर्श’ का विमोचन किया।



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योगी में विराजमान है दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ की तप साधना : बालकनाथ



श्रद्धांजलि समारोह में रोहतक हरियाणा से पधारे और राजस्थान के विधायक महंत बालकनाथ ने कहा कि दोनों महंतद्वय आज भी अपने विचारों, आदर्शों और अपने कार्यों के रूप में हमारे बीच विद्यमान हैं। उन्होंने शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया, जिससे हमारी पीढ़ियों के भविष्य उज्ज्वल हैं। उनके नेतृत्व कौशल की सराहना देश ही नहीं, पूरी दुनिया में हो रही है। महंत बालकनाथ ने उन लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता जताई, जो राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बांटने में जुटे हैं।





पीढ़ियों के भविष्य निर्माण से जुड़ी है गोरक्षपीठ: स्वामी वासुदेवाचार्य



कौशलेश सदन, अयोध्या धाम से आए जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभाष्कर ने कहा कि गोरक्षपीठ शिक्षा को संस्कृति और राष्ट्रीयता के आलोक में लाकर पीढ़ियों के भविष्य निर्माण से अहर्निश जुड़ी है। इसमें इस पीठ के पूज्य संतों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि मैकाले को लार्ड कहना गलत है, वह लार्ड नहीं बल्कि धूर्त था। गोरक्षपीठ ने मैकाले की शिक्षा प्रणाली की बजाय भारतीयता को प्रमुखता देने वाली शिक्षा का वरण पीढ़ियों को कराया।





राजनीति को अपने रंग में रंग देता है संत : डॉ. रामकमल वेदांती



काशी से पधारे कथाव्यास श्रीमद्जगदगुरु अनंतानंद द्वाराचार्य काशीपीठाधीश्वर स्वामी डॉ. रामकमल दास वेदांती ने कहा कि संत के लिए राजनीति भी लोक कल्याण का मार्ग है। संत राजनीति के रंग में खुद नहीं रंगता बल्कि राजनीति को ही अपने रंग में रंग देता है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण गोरक्षपीठ है, जहां के पीठाधीश्वरों ने राजनीति को नई दिशा देकर उसे लोक कल्याण का माध्यम बनाया। अयोध्याधाम से पधारे स्वामी रामदिनेशाचार्य ने कहा कि शैक्षिक पुनर्जागरण और अश्पृश्यता दूर करने के लिए गोरक्षपीठ के योगदान को युगों-युगों तक याद किया जाएगा। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से आज प्रदेश में रामराज्य की परिकल्पना साकार हो रही है। अयोध्याधाम से आए जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य, दुग्धेश्वरनाथ मंदिर गाजियाबाद से पधारे स्वामी नारायण गिरी ने अपने विचार रखे।





सबके आदरणीय और प्रिय थे महंत अवेद्यनाथ : कमलेश पासवान



केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि उनके पिता ने राजनीति का ककहरा ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ से सीखा था। उन्होंने छुआछूत मिटाने के लिए जो अभियान चलाया, वह एक मिसाल है। उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि वे सबके प्रिय और आदरणीय थे। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि कहा कि महंत अवेद्यनाथ महाराज की दिव्यता और उनके विचारों को वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी कार्यशैली में मूर्तमान देखा जा सकता है। सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ ने शिक्षा के साथ ही चिकित्सा स्वास्थ्य की मजबूती को लेकर जो प्रयास किए, वह अनिर्वचनीय हैं। दोनों ही महंत संत के साथ योद्धा भी थे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में पांच सौ साल बाद राम मंदिर बन पाया है तो यह गोरक्षपीठ और इसके पीठाधीश्वरों की देन है।



इस अवसर पर मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, मदन मोहन मालवीय प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, महायोगी गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक अजय, सांसद विजय दूबे, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, भाजपा के महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने भी संबोधित किया।



इस अवसर पर दिगम्बर अखाड़ा अयोध्याधाम के महंत सुरेशदास, हरिद्वार से आए योगी महासभा के महामंत्री योगी चेताईनाथ, श्रीगोरखनाथ आश्रम, भावनाथ तलहटी, जूनागढ़ गुजरात के महंत शेरनाथ, अयोध्या धाम से आए महंत धर्मदास, बृजमोहन दास, बलराम दास, महंत राजू दास, कैथल, हरियाणा से आए पीर योगी शेरनाथ, नीमच, मध्य प्रदेश से पधारे महंत लालनाथ, देवीपाटन शक्तिपीठ, तुलसीपुर के महंत मिथलेशनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी, विधायक फतेह बहादुर सिंह, राजेश त्रिपाठी, प्रदीप शुक्ल आदि उपस्थित रहे।
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