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Gorakhpur News: फाइलेरिया से बचाव व कीड़ी की दवा खाने पर छह की बिगड़ी तबीयत

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सरदारनगर (गोरखपुर)। क्षेत्र के बसडीला गांव में फाइलेरिया से बचाव व बच्चों को कीड़ी मारने की दवा खाने के तीन दिन बाद एक युवती व दो बच्चों समेत छह लोग बीमार हो गए। युवती को सीने में दर्द और गला जाम होने की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं उल्टी-दस्त व घबराहट होने पर अन्य मरीजों का प्राथमिक उपचार हुआ, उनकी हालत अब ठीक बताई जा रही है। सीएमओ का कहना है कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के आधे घंटे के भीतर ही साइड इफेक्ट सामने आता है। तीसरे दिन तबीयत खराब होने का कारण कोई दूसरी बीमारी हो सकती है।
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ग्रामीणों ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरदारनगर के बसडीला गांव में दवा का वितरण किया गया था। रामदयाल शुक्ल की 21 वर्षीय पुत्री संजना 16 अगस्त को फाइलेरिया से बचाव की दवा खाई थी। दवा खाने के बाद से ही उसे दिक्क्त महसूस होने लगी। पिता ने बताया कि रविवार को सीने में दर्द और गला जाम होने की समस्या पर बेटी को पीएचसी ले जाया गया। वहां से डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उसका इलाज चल रहा है। इसी गांव के अमरजीत की 28 वर्षीय पत्नी रीमा को भी दवा खाने के बाद घबराहट होने लगी। बुखार और पेट खराब होने की शिकायत पर उसे भी आशा टीम ने सीएचसी चौरीचौरा ले जाकर इलाज कराया। रामवृक्ष की 25 वर्षीय पत्नी संगीता ने बताया कि दवा खाने के बाद उसे भी उल्टी-बुखार और चक्कर आने की समस्या हुई। उसने एक स्थानीय निजी चिकित्सक से इलाज कराया। गोलू की 24 वर्षीय पत्नी रंजू को फाइलेरिया से बचाव व आठ वर्षीय पुत्र पीयूष को कीड़ी मारने की दवा खाने के बाद उल्टी, बुखार व चक्कर आना शुरू हो गया। इलाज कराने पर अब सब ठीक हैं। वहीं, सरदारनगर पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. हरिओम पांडेय ने बताया कि भारत सरकार की ओर से जारी निर्देश के अनुसार दवा दी जा रही है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। जिन्हें दिक्कत है, वे लोग स्वास्थ्य केंद्र पर आएं, उनका इलाज किया जाएगा। फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने से किसी की तबीयत नहीं बिगड़ी।
माइक्रोफाइलेरी जीवाणु मरते हैं, तब दिखते हैं कुछ लक्षण: सीएमओ
सीएमओ डॉ. आशुतोष दूबे ने बताया कि सरदारनगर क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने से किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई है। इसका साइड इफेक्ट दवा खाने के आधे घंटे के अंदर होता है। जिन लोगों के शरीर में माइक्रोफाइलेरी होंगे उन्हें दवा खाने के बाद हल्की मितली, चक्कर आना, सिरदर्द के लक्षण आ सकते हैं जो सामान्यतया स्वतः ठीक हो जाते हैं। ऐसा तब होता है जबकि शरीर में माइक्रोफाइलेरी जीवाणु दवा से मरने लगते हैं और शरीर इनसे मुक्त हो रहा होता है। जिले में 4133 टीमें घर-घर जाकर दवा खिला रही हैं। टीम को ही उम्र के अनुसार दवा की निर्धारित डोज की सही जानकारी है, इसलिए उनके सामने दवा खाना सुरक्षित है। इसे खाली पेट नहीं खाना है। सभी दवाएं बारी-बारी एक ही साथ खानी है।
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