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गीडा : पुराने उद्योगों को राहत, एक पेपर पर ही देंगे प्रमाणपत्र

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गोरखपुर। गीडा क्षेत्र में वर्ष 1995 से 24 जुलाई 2015 के बीच लगे उद्योगों को उत्पादनरत का सर्टिफिकेट केवल एक पेपर और मौके पर 30 प्रतिशत से अधिक निर्माण पर मिल जाएगा। इसके लिए गीडा प्रशासन नियमावली में संशोधन को तैयार हो गया है। इसका प्रस्ताव बनाकर कमिश्नर को भेज भी दिया गया है। अक्तूबर में होने वाली गीडा बोर्ड की बैठक में इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इस संशोधन से करीब 400 उद्यमियों को राहत मिलेगी।
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गोरखपुर शहर और सहजनवा के बीच स्थित गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) क्षेत्र में करीब 400 फैक्टरियां ऐसी हैं, जो वर्ष 2015 से पहले क्रियाशील हो चुकी हैं। शासन ने औद्योगिक क्षेत्र में आवंटित भूखंडों के उपयोग की सही जानकारी पाने के लिए एक आदेश जारी कर सभी उद्योगों को उत्पादनरत का सर्टिफिकेट लेने का निर्देश दिया। बैंक लोन, छूट और अन्य ऐसे कार्यों के लिए उत्पादनरत का सर्टिफिकेट अनिवार्य भी कर दिया गया है, लेकिन इस सर्टिफिकेट के लिए उद्यमियों को काफी परेशान होना पड़ता है। क्योंकि इस प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते वक्त उद्यमी को पहली खरीद-बिक्री का बिल, जीएसटी बिल, बिजली का मीटर लगने का बिल आदि पांच पेपर प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
उद्यमियों की दिक्क्त यह थी कि फैक्टरी के लिए पहले सामान की खरीद या पहले उत्पाद का बिल रखना अनिवार्य नहीं था, तो किसी ने ऐसा पेपर रखा नहीं था। दूसरी दिक्कत यह थी कि जीएसटी 2014 के बाद लागू की गई तो इससे पहले वाले उद्यमी इससे संबंधित पेपर कहां से लाएंगे। इस बीच गीडा प्रशासन की तरफ से करीब 500 उद्यमियों को नोटिस भेजकर 31 दिसंबर से पहले उत्पादनरत का सर्टिफिकेट लेने का निर्देश दिया गया। सर्टिफिकेट नहीं लेने पर इनके भूखंड का आवंटन निरस्त करने की चेतावनी दी गई। बैंकों को भी बिना उत्पादनरत का सर्टिफिकेट लिए कोई लोन देने पर व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदारी लेने की बात कही गई थी। इससे उद्यमियों में गहरी नाराजगी थी।
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अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा, शासन ने लिया संज्ञान



उद्यमियों की इस समस्या को अमर उजाला ने 20 सितंबर के अंक में गीडा ने 500 उद्यमियों को भेजो नोटिस, लेना होगा उत्पादनरत का सर्टिफिकेट शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अगले दिन 21 सितंबर के अंक में भी गीडा: केवल एक पेपर पर ही मिल सकता है उत्पादनरत का सर्टिफिकेट शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज से जुड़े उद्यमियों ने शासन स्तर पर पत्र भेजकर इस समस्या के निस्तारण की मांग की थी। गोरखपुर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी जानकारी में यह मामला पहुंचा था। इसके बाद उद्यमियों को राहत देने के लिए नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की गई।







वर्ष 2016 के प्रस्ताव को बनाया गया आधार



उद्यमियों की इस समस्या पर गीडा बोर्ड में 2015 में भी चर्चा हो चुकी थी। 24 जुलाई 2015 को हुई गीडा बोर्ड की 45 वीं बैठक में आवंटियों को समय विस्तार दिया गया था। चैंबर्स ऑफ इंडस्ट्रीज गोरखपुर के अध्यक्ष आरएन सिंह ने बताया कि गीडा बोर्ड की 2016 में हुई बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद उद्यमी से मीटर सीलिंग बिल या इस प्रकार का एक बिल लेकर ही पंजीकरण करने पर सहमति बन गई थी, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। अगर उस नियम को लागू किया जाए तो उद्यमियों को काफी राहत मिलेगी। इसके बाद गीडा प्रशासन ने उस पुराने प्रस्ताव की तलाश कराई। रिकार्ड मिलने के बाद उसे ही कुछ संशोधन के साथ पुन: स्वीकृति के लिए प्रस्तावित किया गया।



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कोट



कैंप लगाकर वितरित हो सर्टिफिकेट



चैंबर्स ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि उद्यमियों को राहत देने के लिए गीडा प्रशासन ने जो निर्णय लिया है, वह सराहनीय है। अब यह प्रयास होना चाहिए कि सभी उद्यमियों से एक साथ आवेदन पत्र जमा करा लिया जाए और सर्टिफिकेट तैयार होने पर एक साथ उनका वितरण करा दिया जाए। इसके लिए गीडा कार्यालय या किसी अन्य जगह पर कैंप लगाया जा सकता है। इससे न केवल उद्यमियों को व्यर्थ की भागदौड़ से राहत मिलेगी, बल्कि प्रमाण पत्र लेने में होने वाली अन्य दिक्कतों का भी सामना नहीं करना पड़ेगा।







वर्जन



पुराने आवंटियों को पांच में से केवल एक पेपर पर ही उत्पादनरत का सर्टिफिकेट देने के लिए नियमावली में संशोधन करना होगा। इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार किया गया है। अक्तूबर में गीडा बोर्ड की बैठक में इस पर सहमति मिल जाएगी, जिन आवंटियों को नोटिस भेजा गया है, उन्हें अभी 31 दिसंबर तक का समय दिया गया है। इससे पहले ही प्रभावित हो रहे सभी उद्यमियों को उत्पादनरत का प्रमाण पत्र दे दिया जाएगा।
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अनुज मलिक, सीईओ गीडा
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