गोरखपुर। पितृपक्ष में बाजारों में चहल-पहल काफी कम हो गई है। रेडिमेड गारमेंट से लेकर सराफा बाजार तक में सन्नाटा पसरा है। कपड़ों का थोक कारोबार 50 से 60 फीसदी जबकि सराफा कारोबार भी महज 25 फीसदी रह गया है। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक का बाजार भी 50 प्रतिशत तक गिरा है। इस हिसाब से रोजाना होने वाले पूरे बाजार के कारोबार का आंकड़ा देखें तो करीब 600 करोड़ से सिमट कर 200 करोड़ तक आ गया है। गारमेंट के दुकानदार छूट और सेल के ऑफर देकर माल खपाने में जुटे हैं, ताकि उनका रुटीन का खर्च निकल सके।
हिंदी बाजार स्थित सराफा बाजार में चहल-पहल नहीं थी। दुकानों पर इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आए। एक दुकान पर तो कई दुकानदार ही बैठकर बातचीत कर रहे थे। दशहरा और दिवाली के बाजार की तैयारियाें में भी जुटे थे। सोने-चांदी के गहनों की नई डिजाइन का कैटलॉग मंगाने और आर्डर की बातें चल रही थीं। सराफा कारोबारी पंकज गोयल का कहना है कि पीक ऑवर में रोजाना करीब 400 करोड़ का कारोबार होता है, लेकिन अब यह 100 करोड़ तक ही रह गया है।
इसी तरह पितृपक्ष में लोग नए कपड़े भी कम ही खरीदते हैं। नखास चौक के थोक विक्रेता निजाम का कहना है कि पितृपक्ष में दुकान का खर्च निकाल पाना मुश्किल हो जा रहा है। इसलिए, छूट और अन्य ऑफर देकर किसी तरह बिक्री को बढ़ा रहे हैं। थोक में कपड़ों के बाजार का टर्नओवर आम दिनों में करीब 100 करोड़ रुपये का है, जो पितृपक्ष में घटकर 40 से 50 करोड़ ही रह गया है। बाजार में सन्नाटा होने की वजह से दुकानदार इस समय को दूसरे काम में लगा रहे हैं। कोई नया माल भरने में लगा है तो कोई आने वाले सीजन को देखते हुए दुकान की सफाई कर रहा है। उन्हें उम्मीद है पितृपक्ष के बाद ग्राहकों की भीड़ बढ़ेगी।
बोले व्यापारी
रक्षाबंधन और तीज के बाद से ही कपड़े का मार्केट डाउन है। बिक्री भी आधी हो गई है। इवेंट और सेल के जरिए बड़े व्यापारी अपने नुकसान की भरपाई कर रहे हैं, लेकिन छोटे व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा है। इस साल गर्मी के सीजन में भी लगन कम थी। अब आने वाले त्योहार और लगन के सीजन से काफी उम्मीद है।
- राजेश नेभानी, अध्यक्ष, चेंबर ऑफ टेक्सटाइल सोसाइटी
पितृपक्ष में बाजार में सन्नाटा होने के बावजूद सोने के दाम ऊपर हैं। इसका भी असर है। बिक्री घटकर 25 प्रतिशत तक रह गई है। इस खाली समय में व्यापारी नए डिजाइन और नया स्टॉक भर रहे हैं, ताकि आने वाले त्योहारों के सीजन में नुकसान की भरपाई हो सके।
- महेश वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्वांचल सोनार सोसाइटी
सितंबर की शुरुआत से ही इलेक्ट्रॉनिक सामान की बिक्री बहुत कम है। रिटेल में बहुत कम ग्राहक आ रहे हैं। जिनके यहां कोई काम चल रहा है, वही कुछ खरीदारी कर रहे हैं। इस बीच व्यापारी दुकानों का रेनोवेशन कर रहे हैं। आगे आने वाले सीजन से बहुत उम्मीद है।
- राहुल सिंह, इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी
धर्माचार्य बोले-पितृपक्ष में खरीदारी शुभ नहीं
पितृपक्ष में नए वस्तुओं की खरीदारी को सही नहीं माना गया है। लोहा, गहने, भूमि, वाहन व सरसों का तेल खरीदना अच्छा नहीं माना जाता है। अगर खरीदारी करते हैं तो दान जरूर करें। चावल, वस्त्र व तिल खरीदकर दान करना चाहिए।
पंडित अरविंद कुमार चतुर्वेदी, आचार्य संस्कृत विद्यापीठ गोरखनाथ मंदिर
वैसे तो पितृ पक्ष में खरीदारी नहीं करने का वर्णन कहीं नहीं है, लेकिन मान्यता है कि स्वयं के लिए कुछ भी नहीं खरीदना चाहिए, क्योंकि पूर्वज प्रत्येक खरीदारी में दान करने की ही उम्मीद लगाते हैं। यह भी मान्यता है कि जिनके पिता जीवित हैं, वह कुछ भी खरीद सकता है। उसे श्राद्ध नहीं करना होता है, लेकिन जिसको श्राद्ध करना है, वह उन्हीं वस्तुओं की खरीदारी करता है, जिसको दान करना होता है।
पं. डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र, सहायक आचार्य संस्कृत विद्यापीठ