गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की ओर से नया गोरखपुर के लिए कुसुम्ही क्षेत्र के तीन गांवों में शुरू की गई जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया का स्थानीय किसानों ने जोरदार विरोध किया है। सोमवार को चौरीचौरा तहसील के ग्राम माड़ापार, सदर तहसील के तकिया मेदनीपुर एवं कोनी के लोगों ने अधिग्रहण की प्रक्रिया वापस लेने की मांग की है। जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में उन्होंने अपर जिलाधिकारी प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने कहा कि उनकी जमीन बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर मांगी जा रही है। प्रशासन को सौंपे मांग पत्र पर तीनों गांवों के लगभग 500 किसानों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने मांगें न मानने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
किसानों का नेतृत्व कर रहे पूर्व जिला पंचायत सदस्य कुंवर प्रताप सिंह ने बताया कि तीनों गांव शहर से लगभग 15 किलोमीटर के भीतर बसे हैं। यहां जमीन की वर्तमान कीमत 10 से 20 लाख रुपये प्रति डिसमिल है। जबकि जीडीए 70 हजार रुपये से एक लाख रुपये प्रति डिसमिल का मुआवजा प्रस्तावित कर रहा है। जमीन अधिग्रहण करने के बाद जीडीए इसे महंगे दाम पर बेचेगा। अधिग्रहण हुआ तो छोटे किसान भूमिहीन हो जाएंगे।
बिना किसानों की सहमति के जमीन लेना उचित नहीं है। जीडीए की ओर से दो बार किसानों से बातचीत कर सहमति बनाने का प्रयास किया गया था लेकिन कोई किसान जमीन देने को सहमत नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जमीन का अधिग्रहण 2016 के सर्किल रेट के आधार पर किया जा रहा है क्योंकि उसके बाद से सर्किल रेट बढ़ा ही नहीं है। शहर से नजदीक होने के कारण इन गांवों की जमीन पर गोरखपुर के साथ ही बिहार के कई जिलों के लोग मकान बनवाकर रहने लगे हैं। किसानाें ने कहा कि इन गांवों के सभी किसान भूमि अधिग्रहण के विरुद्ध हैं। ऐसे में जीडीए को 19 सितंबर को प्रकाशित अधिसूचना को वापस लेना चाहिए।
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जीडीए ने अनिवार्य अर्जन की शुरू की है प्रक्रिया
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने नया गोरखपुर के लिए कुसुम्ही क्षेत्र के तीन गांवों में अनिवार्य अर्जन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसको लेकर 19 सितंबर को तीनों गांवों में लगभग 623 एकड़ जमीन के लिए धारा चार का प्रकाशन कराया गया है। इसके तहत अनिवार्य अर्जन की प्रक्रिया शुरू मानी जाती है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी की ओर से चौरीचौरा तहसील के माड़ापार में लगभग 374 एकड़, सदर तहसील के कोनी गांव में 140 एकड़ एवं तकिया मेदनीपुर गांव में 109 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इन गांवों में जो गाटे लिए जाने हैं, उनका प्रकाशन कराया जा चुका है।