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Gorakhpur News: विसर्जित हुई आस्था भी... प्रतिमाओं से जेवर-नकदी के लिए छीनाझपटी

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गोरखपुर। आस्था और श्रद्धा के साथ नौ दिनों तक मां दुर्गा की प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन किया गया, लेकिन विसर्जन के दिन सभी मर्यादाएं भूल गए। राप्ती तट के किनारे बनाए गए पोखरों में जैसे ही प्रतिमाएं विसर्जित की गईं, पोशाक, जेवर, नकदी और शस्त्र लूटने के छीनाझपटी शुरू हो गई। कलश और पूजा की सामग्री बिखरी पड़ी थी और विसर्जन करने वाले भी प्रतिमाओं से निकले मलबे को कुचलते जाते नजर आए। श्रद्धा और आस्था के इस विसर्जन को जिसने भी देखा, उसका मन दुखी हो गया।
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एकला बंधे के पास बने कृत्रिम पोखरे में मूर्तियां विसर्जित की जा रही थीं। सुबह से महिलाएं, बच्चे और युवा पहुंचकर प्रतिमाओं को खींचकर किनारे ला रहे थे। कोई मूर्ति से कपड़े निकाल रहा था तो कोई लकड़ी। कई महिलाएं आभूषणों को निकालने में जुटी थीं। घाट पर प्रतिमाओं और कलश सहित अन्य पूजन सामग्री को लूटने की होड़ रही।
शाम चार बजे नगर निगम के कर्मचारी सफाई में जुट गए। जेसीबी की मदद से पोखरे से लकड़ी और अन्य सामान निकाले जा रहे थे। सफाई में निकले सामान को किनारे रख रहे थे। छीनाझपटी करने वालों को मना भी कर रहे थे पर वे मानने को कहां तैयार थे। सामानों को ले जाने के लिए कुछ तो ठेला लेकर पहुंच गए।
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महिलाएं खोज रही थीं जेवर
प्रतिमाओं से निकली बांस-बल्ली किनारे रखी थी। कई महिलाएं उसपर चढ़कर जेवर और कपड़े निकाल रही थीं। लकड़ी को कुछ बेचने की तैयारी में थे तो कुछ घरों में उपयोग के लिए। लकड़ी इकट्ठा कर रहे दिवाकर ने बताया कि वह इसे घर में उपयोग के लिए लेकर जा रहे हैं। कुछ महिलाएं और बच्चे बांस सहित ढांचे के अन्य सामान ले जाते नजर आए। नौसड़ की दुलारी देवी ने बताया कि प्रतिमा से निकले वस्त्र को वह घर में इस्तेमाल करेंगी।
नथिया और पैसे के लिए डुबकी मारते रहे बच्चे
देवी प्रतिमाओं में बहुत सारे लोग सोने की नथिया पहनाते हैं। नथिया और पैसे की तलाश में बहुत सारे बच्चे पानी में डुबकी मारते नजर आए। प्रतिमा के पास पैसे की तलाश कर रहे राजू ने बताया कि दो घंटे में वह 115 रुपये निकाल चुका है। उसके साथ उसका दोस्त भी है।

बाक्स
एप्रोच मार्ग में फंसे वाहन
एकला बांध पर दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन वाले कुछ वाहन रविवार देर रात एप्रोच मार्ग में फंस गए, उन्हें तत्काल पोकलेन और जेसीबी की मदद से निकाल कर सड़क पर राबिश डाली गई। रात से लेकर भोर तक अधिकांश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस दौरान नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्र, निरंकार सिंह, शिवपूजन यादव, मुख्य अभियंता संजय चौहान भ्रमणशील रहकर दुर्गा विसर्जन स्थलों की निगरानी में जुटे रहे। विसर्जन स्थलों पर पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, सुरक्षा, टॉयलेट के इंतजाम रहे। विसर्जन स्थलों पर 1800 की संख्या में ट्यूबलाइटें लगाई गई हैं।
रविवार सुबह तक 620 देवी प्रतिमाएं विसर्जित हुईं
नगर निगम के अनुसार, रविवार सुबह तक 620 देवी प्रतिमाएं विसर्जित की गईं। एकला बांध पर 434 दुर्गा प्रतिमाएं, डोमिनगढ़ में 100 और महेसरा में 85 के करीब दुर्गा प्रतिमाएं विसर्जन के लिए रविवार सुबह तक पहुंचीं थीं। रविवार को दोपहर बाद प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हुआ। रात नौ बजे तक एकला बांध पर करीब 400, डोमिनगढ़ में 70 और महेसरा में 65 के करीब दुर्गा प्रतिमाएं विसर्जन के लिए पहुंचीं। सभी पांच कृत्रिम तालाब पर छह पोकलेन और छह जेसीबी लगाए गए थे।
बोले आचार्य
नवरात्र के दिनाें में बड़े ही आस्था के साथ श्रद्धालु माता जगतजननी की पूजा-अर्चना आवाह्न कर करते हैं। माता की प्रतिमा विसर्जन का विधान भी दशमी को है। देखा जा रहा है कि प्रतिमा विसर्जन के बाद लूट-खसोट मच जा रही है। कुछ लोग जल में माता की प्रतिमा से गहने व कपड़े निकाल ले रहे हैं। यह आस्था के हिसाब से सही नहीं है। इस पर रोक लगनी चाहिए।
- डॉ दिग्विजय शुक्ल, ज्योतिष विभागाध्यक्ष, श्रीगोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ


देवी प्रतिमा का जिस आस्था व श्रद्धा के साथ पूजन-अर्चन करते हैं, विसर्जन भी वैसे ही करना चाहिए। लेकिन, लोग विसर्जन के समय इसे भूल जा रहे हैं। यह बहुत ही खराब है। लूट-खसोट और छीनाझपटी करने से समाज में खराब संदेश जाता है। खासकर उन श्रद्धालुओं की श्रद्धा का उपहास है, जो पंडाल में जाकर पूजन-अर्चन करते हैं। जिम्मेदारों को एक घेरा बनाना चाहिए, ताकि विसर्जन स्थल के पानी में कोई भी ना घुसने पाए। प्रतिमाओं से वस्त्र ना निकाल पाए व श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहे।
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-पं. बृजेश पाण्डेय ,ज्योतिषाचार्य, संस्थापक अध्यक्ष श्रीहनुमत ज्योतिष सेवा संघ
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