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मानवता के खिलाफ काम करने वाले का रावण की भांति जलेगा पुतला : सीएम

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गोरखपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विजयादशमी पर एक तरफ जहां प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक होता है, उनकी आरती उतारी जाती है तो वहीं दूसरी तरफ इस अवसर पर रावण का पुतला दहन भी होता है। इसमें यह संदेश निहित है कि जो भी मानवता के खिलाफ काम करेगा, अत्याचार करेगा, अधर्म और असत्य के मार्ग पर चलेगा उसका ऐसे ही पुतला जलेगा। चाहे वह कोई भी हो। जो धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलते हुए मानवता का कल्याण करेगा, विरासत और विकास में सहभागी बनेगा उसकी, श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण और रामभक्त हनुमान के रूप में उसकी पूजा होती रहेगी, अभिनंदन होता रहेगा।
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मुख्यमंत्री शनिवार को मानसरोवर रामलीला मैदान में प्रभु श्रीराम के राजतिलक के बाद श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं अन्य जगह जब सभ्यता का नामोनिशान नहीं था तब भारत में सभ्य सनातन समाज अस्तित्व में था। सनातन समाज कभी विपन्न नहीं रहा। वह बुद्धि और वैभव में सदैव अग्रणी रहा। साजिश के तहत क्षेत्र, जाति, भाषा, मत आदि के नाम पर मध्यकाल में उसे विभाजित किया गया जिसके विषाणु आज भी यत्र-तत्र बिखरे पड़े हैं। इन विषाणुओं को हमें पनपने नहीं देना है। सीएम ने कहा आज मानसरोवर मंदिर के पास जहां यह रामलीला हो रही है वहां मंदिर के दर्शन कम भैंस के दर्शन अधिक होते थे। जबकि आज यूपी में मानसरोवर मंदिर सहित एक हजार से अधिक स्थानों का पुनरुद्धार हो चुका है।



सामाजिक एकता भारत की विरासत का हिस्सा

मुख्यमंत्री ने कहा कि संगठित रहने के लिए, संगठन की ताकत दिखाने के लिए आवश्यक है कि हम जाति, मत, संप्रदाय, भाषा, छुआछूत जैसे भेदभाव से दूर रहें। इसी संदेश से लोगों को जोड़ने के लिए अयोध्या में जहां 500 वर्षों के बाद प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बना है तो वहीं श्रीराम की कथा को देने वाले महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अयोध्या के एयरपोर्ट का नामकरण किया गया है। अयोध्या में रसोईगृह माता शबरी के नाम पर बनी है तो यात्री विश्रामालय भगवान राम के अभिन्न सखा निषादराज के नाम पर। यह सामाजिक एकता भारत की विरासत का हिस्सा है। वर्ष 2025 में प्रयागराज में भव्य और दिव्य कुंभ का आयोजन भी विरासत के प्रति निष्ठा का प्रदर्शन होगा।
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मंदिर निर्माण को साकार होता देखना था गुरुदेव का अंतिम सपना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम मंदिर निर्माण के लिए हुए आंदोलन का उल्लेख करते हुए अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को याद कर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनके गुरुदेव का आखिरी सपना मंदिर निर्माण को साकार होते देखना था। उनके जीवन के अंतिम क्षणों में जब विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल उनसे मिलने आए तब उन्होंने उनसे यही कहा था, राम मंदिर निर्माण कब तक हो पाएगा। एक बार मंदिर निर्माण देख लेते तो जन्म धन्य हो जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब राम मंदिर बन गया है तो उनके गुरुदेव समेत अनगिनत संतों को तसल्ली हो रही होगी।


इस अवसर पर मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, अयोध्या से आए धर्मदास, काशी से आए संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पूर्व मेयर सीताराम जायसवाल, उद्यमी चंद्र प्रकाश अग्रवाल, शोभित मोहनदास, लोक गायक राकेश श्रीवास्तव, रामलीला समिति के अध्यक्ष रेवती रमन दास, महामंत्री पुष्पदंत जैन आदि मौजूद रहे।
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