गोरखपुर। गैस्ट्रो सर्जन डाॅ. अनुज सरकारी प्रकरण पर चर्चा के लिए आईएमए कार्यकारिणी की ऑनलाइन बैठक हुई। इसमें कहा गया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन इस मामले में पूरी तरह से डॉ. अनुज सरकारी और उनके परिवार के साथ खड़ा है। पदाधिकारियों ने कहा कि डा. अनुज सरकारी की आड़ में कुछ लोग डॉक्टरों को लक्ष्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे आईएमए चिंतित है।
डाॅक्टरों ने कहा कि 20 से 25 वर्षों की कठिन पढ़ाई के बाद एक बालक बेहतरीन चिकित्सक बन पाता है। शिक्षा, त्याग व समर्पण से ही चिकित्सक इस दक्षता को प्राप्त करते हैं कि किसी के बीमारी और दर्द को कम कर सकें। डॉक्टर मरीज की जान बचाने के लिए अपने सारे सुखाें का त्याग करते हैं। 70 के दशक में जब पूर्वांचल में मानसिक मंदित बच्चों के उपचार व पुनर्वास का केंद्र नहीं था, तब आईएमए के डॉक्टर ही आगे आए। सात वर्षों से सीतापुर आई अस्पताल में आईएमए की तरफ से नि:शुल्क ओपीडी का संचालन किया जा रहा है।
बाढ़ व भूकंप की त्रासदी हो या फिर हाल ही में आई कोरोना त्रासदी। आईएमए के सदस्यों ने अपनी जान की परवाह न कर मरीजों का उपचार किया। इस दौरान गोरखपुर के 15 चिकित्सकों ने अपने प्राण गंवा दिए। ऐसे में चिकित्सक समुदाय के वरिष्ठ सदस्य हुए हमले के बाद हो रही राजनीति पीड़ादायक है। इस घटना की आड़ में कुछ लोग राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। चिकित्सक पर जानलेवा हमले को किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। आईएमए के चिकित्सक सदस्य डाॅ. अनुज सरकारी एवं उनके परिवार के साथ हैं।
बैठक में अध्यक्ष डाॅ. स्मिता जायसवाल, सचिव डाॅ. अमित मिश्रा, उपाध्यक्ष डाॅ. संजीव सिंह व डाॅ. वाई सिंह, कोषाध्यक्ष डाॅ. नीरज श्रीवास्तव व ऑडिटर डाॅ. अजय शुक्ला शामिल हुए।
-
डॉक्टरों पर लगाए जा रहे गलत आरोप
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रितेश ने कहा कि डॉ. अनुज सरकारी प्रकरण के बहाने तमाम लोग डॉक्टरों पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। इलाज अगर महंगा है तो इसके लिए दवा और महंगे उपकरण जिम्मेदार हैं। डॉक्टर 24 घंटे मरीज का उपचार करता है। कोई डॉक्टर ऐसा नहीं चाहता कि उसके यहां इलाज के लिए आया मरीज बिना ठीक हुए चला जाए। इसके बाद भी डॉक्टरों को निशाना बनाना ठीक नहीं है।