एम्स में एआई तकनीक का उपयोग कर चेहरे की दुर्लभ बीमारी हेमीमैडिबुलर हाइपरप्लेशिया का ऑपरेशन किया गया। इसमें चेहरे पर बिना चीरा लगाए ऑपरेशन किया गया। एम्स में यह पहला इतना जटिल ऑपरेशन है। अभी तक ऐसे मरीजों को ऑपरेशन के लिए दिल्ली या लखनऊ जाना पड़ता था।
कुशीनगर के 15 वर्षीय बच्चे का चार साल पहले पिता तथा आसपास के लोग ने महसूस किया कि कुछ महीनों से बच्चे का चेहरा धीरे धीरे टेढ़ा हो रहा है। इसके बाद बच्चे के पिता ने वाराणसी, लखनऊ, गोरखपुर के बहुत सारे डॉक्टरों एवं अस्पतालों को दिखाने के बाद भी जब समस्या बढ़ती चली गई।
इसके बाद उन्होंने गोरखपुर एम्स के दंत रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डाॅ. शैलेश कुमार को दिखाया। गहन जांच और स्कैन के बाद मरीज की इस जटिल समस्या का पता चला। इसके बाद डाॅ. शैलेश की टीम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा लेकर चेहरे पर बाहर से बिना कोई चीरा लगाए ऑपरेशन किया।
इस तकनीक में सर्जरी से पहले चेहरे का विशेष तरह का कंप्यूटराइज्ड स्कैन करके सर्जिकल ऑपरेशन सॉफ्टवेयर की सहायता से सर्जिकल कटिंग गाइड बनाया गया, जिससे ऑपरेशन करने के पहले ही ऑपरेशन की रूपरेखा मिल जाए।
इससे बिल्कुल सटीक और कम समय में ऑपरेशन किया गया। डाॅ. शैलेश ने बताया कि ऐसे मरीजों में बेहोशी की प्रक्रिया बहुत ही जटिल होती है, जिसके लिए विशेष उपकरण और बहुत तैयारी की जरूरत होती है। मरीज की सर्जरी पूर्ण बेहोशी में की गई।
आमतौर पर ऐसे ऑपरेशन में पांच से छह घंटे लगते है, लेकिन इस ऑपरेशन में केवल तीन घंटे लगे। आमतौर पर विदेशों में ऐसी तकनीक से ऑपरेशन किया जाता है। बच्चों के चेहरे में होने वाले किसी भी एक्सीडेंट, चोट को नजरअंदाज ना करे और किसी भी ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन से ही संपर्क करे।
एम्स निदेशक डॉ. अजय सिंह ने डाॅ. शैलेश कुमार एवं उनकी टीम को सफल ऑपरेशन की बधाई दी। ऑपरेशन के बाद मरीज अभी स्वस्थ है और स्पेशल वार्ड में डॉ. शैलेश की निगरानी में है। ऑपरेशन में दंत विभाग के एसआर डॉ. प्रवीण कुमार एवं जेआर डॉ. दिव्या पाठक, डाॅ. अंकुर पांडेय और एनेस्थीसिया विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. विक्रम वर्धन, डाॅ. भूपिंदर सिंह शामिल रहे।
क्या है हेमीमैडिबुलर हाइपरप्लेशिया
यह बीमारी लाखों में एक व्यक्ति को होती है। यह बीमारी अचानक किसी व्यक्ति में शुरू हो जाती हैं, जिससे धीरे-धीरे आधा चेहरा बड़ा और टेढ़ा होने लगता है। शुरुआत में प्रक्रिया की गति कम होने से व्यक्ति को केवल भ्रम होता है कि चेहरे में परिवर्तन हो रहा है।
इस बीमारी का सही समय पर इलाज ना कराया जाए तो एक तरफ का आधा चेहरे बड़ा होता ही चला जाता है। जिसके कारण विकृत चेहरा, टेढ़ी आंख, सांस लेने में परेशानी और दांतों का आपस में ना मिलना, खाने में दिक्कत आदि हो सकती है।