घड़ी बदलने के काम शुरु...ऐसी डिजिटल घड़ी लगेगी
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गोरखपुर। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी कई कहानियों को समेटे घंटाघर के जीर्णोद्धार का कार्य तेजी से चल रहा है। इसमें डिजिटल घड़ी लगनी है। अप्रैल के अंत तक घंटाघर नए स्वरूप में नजर आएगा। 15वें वित्त आयोग के तहत मिले बजट से नगर निगम इसका कायाकल्प करा रहा है। घंटाघर के सुंदरीकरण में एक करोड़ रुपये खर्च होंगे।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसका शिलान्यास किया था। शहर के हिंदी बाजार स्थित घंटाघर काफी समय से मरम्मत न होने की वजह से जर्जर हो गया था। इस ऐतिहासिक स्थल को आने वाली पीढ़ी भी देख सके, इसके लिए नगर निगम ने इसके सुंदरीकरण की योजना बनाई थी।
इसके तहत घंटाघर की दीवारों के मरम्मत का कार्य लगभग पूरा हो गया है। अब रंग-रोगन शुरू होगा। पुरानी घड़ी निकाल दी गई है। वहां अब डिजिटल घड़ी लगाई जाएगी। इसमें डिजिटल बेल भी लगेगी जो हर घंटे बजेगी। नगर निगम के मुख्य अभियंता संजय चौहान ने बताया कि फर्म को तेजी से काम पूरा करने को कहा गया है।
1930 में हुआ था निर्माण
वर्तमान में जहां घंटाघर है वहां 1857 में एक विशाल पाकड़ का पेड़ हुआ करता था। इसी पेड़ पर पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अली हसन के साथ दर्जनों स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई थी। 19 दिसंबर 1927 को जब जिला कारागार में स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी दी गई तो शहर में निकली उनकी शवयात्रा इसी स्थान पर आकर रुकी थी।
उसी दौरान बिस्मिल की माता ने यहां पर एक प्रेरणादायी भाषण भी दिया था। इस घटना के बाद ये स्थान पूरी तरह से पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को समर्पित हो गया। 1930 में यहां घंटाघर का निर्माण कराया गया। इस पर बिस्मिल का चित्र भी है।