गोरखपुर। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय में बुधवार की रात धरना देने वाले प्रोफेसर जोन्नादा एवीपी राव की एनओसी विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंध्रा यूनिवर्सिटी को ऑनलाइन भेज दिया है। यह एनओसी वही है, जिसे बदलने के लिए प्रोफेसर धरने पर बैठे थे। इसमें प्रोफेसर के पूर्व निलंबन, वेतन बाधित होने और बिना बताए यूनिवर्सिटी से गायब रहने आदि का जिक्र है। ऐसे में प्रोफेसर को क्लियर एनओसी नहीं मिलने पर उनके चयन पर संकट आ सकता है।
मूलत: आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के रहने वाले गोरखपुर विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर जोन्नादा एवीपी राव ने कुलपति पद के आवेदन करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) की मांग की थी। बुधवार की शाम को विश्वविद्यालय ने उनको एनओसी देने के साथ उसमें पूर्व में उनपर हुई कार्यवाही को भी अंकित किया। वह क्लियर एनओसी की मांग को लेकर शाम करीब सात बजे कुलसचिव कार्यालय में धरने पर बैठ गए। रात करीब 10 बजे पुलिस की मौजूदगी में कुलसचिव कार्यालय से जबरन बाहर निकाला गया।
वह बृहस्पतिवार को भी कुलपति से मिलने पहुंचे। लेकिन, मुलाकात न होने पर क्लियर एनओसी की मांग को लेकर अपना पत्रक कार्यालय में रिसीव करा दिया। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंध्र यूनिवर्सिटी को ऑनलाइन उनकी वास्तविक एनओसी को ईमेल कर दी। इस एनओसी में उनके द्वारा लंबे समय तक बिना सूचना विश्वविद्यालय से गायब रहने, कोर्ट के आदेश पर फिर ज्वाइन करने और विश्वविद्यालय पर केस करने का जिक्र प्रमुख रूप से अंकित है। इसके साथ ही हाल के दिनों में उनपर हुए निलंबन की कार्रवाई का भी जिक्र किया गया है।
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नोटिस का जवाब मिलने पर राजभवन भेजी जाएगी फाइल
कुलपति के आदेश पर कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी ने प्रोफेसर जोन्नादा एवीपी राव को बृहस्पतिवार को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कारण बताओ नोटिस उनके मोबाइल के व्हाट्सएप, ईमेल, विभाग में भेजने के साथ पोस्ट से उनके पते पर भेजा गया है। कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब मांगा है। नोटिस का जवाब मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन प्रोफेसर की फाइल राजभवन भेजने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में प्रोफेसर पर अनुशासनात्मक व्यवहार पर टर्मिनेट की कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
वर्जन....
प्रो. जोन्नादा एवीपी राव की वास्तविक एनओसी को संबंधित यूनिवर्सिटी को ईमेल कर दिया गया है। कारण बताओ नोटिस का जवाब मिलने पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
प्रो. शांतनु रस्तोगी, कुलसचिव, डीडीयू