संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अब स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम और अनुदानित काॅलेजों के स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रम के संविदा शिक्षक भी शोध कराएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें सह-शोध निर्देशक बनाने का न केवल निर्णय लिया है, बल्कि इसके लिए दिशा-निर्देश भी जारी कर दिया है। शोध, नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
इस निर्णय के पीछे विश्वविद्यालय एक अन्य उद्देश्य शोध के दायरे को बढ़ाना और संबद्ध संस्थानों के शिक्षकों व विद्यार्थियों में अनुसंधान की ललक जगाना है। शोध को लेकर यह निर्णय नए पीएचडी अध्यादेश के उस नियम के तहत लिया गया है, जिसमें यह व्यवस्था दी गई है कि विभागीय शोध समिति से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद संविदा पर कार्य कर रहे शिक्षकों को सह-शोध निर्देशक बनाया जा सकता है।
विभागीय अनुसंधान समिति संविदा शिक्षकों को सह-शोध निर्देशक बनाने से पहले शोध अध्यादेश के मानक पर उनकी पात्रता का मूल्यांकन करेगी। पात्र पाए जाने पर अपनी अनुशंसा शोध व विकास प्रकोष्ठ को भेजेगी।
प्रकोष्ठ अनुशंसा प्राप्त शिक्षक को सह-शोध निर्देशक बनाने की संस्तुति देगा और उनका नाम संबंधित विभाग में भेजेगा। विभाग यह निर्णय लेगा कि उन्हें किस शोध छात्र का सह-शोध निर्देशक बनाना है। संविदा शिक्षकों को सह-शोध निर्देशक बनाने की अंतिम स्वीकृति कुलपति की ओर से दी जाएगी।न