गोरखपुर के बेतियाहाता दक्षिणी में जलनिकासी की समस्या जस की तस बनी हुई है। इधर, स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 के लिए केंद्रीय टीम गोरखपुर आने वाली है। इसके पहले शहर के प्रमुख वार्डों में से एक में यह समस्या नंबर कम कर सकती है। सिक्सलेन से सटे पीडब्ल्यूडी की ओर से निर्माणाधीन नाले की बरती जा रही उपेक्षा से करीब 500 घरों के सामने जल निकासी की समस्या बनी हुई है।
मंगलवार की सुबह 11 बजे सिक्सलेन से सटे नाला निर्माण के लिए अलग-अलग पैच पर काम कर रहे मजदूरों को एकत्र कर पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने सफाई निरीक्षक सुनील मणि त्रिपाठी की मौजूदगी में अपने सामने रुस्तमपुर में बंद पड़े मुख्य नाली के आउटलेट को खुलवाना शुरू किया।
सिक्सलेन की निर्मित दीवार को काटने के लिए उन्होंने सहायक अभियंता से कटर मशीन भी मंगाई। इससे थोड़ी राहत मिली, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका। पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता संजय गुप्ता से समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन तीन दिन बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
गलियों में भरे पानी ने स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मंगलवार को रुस्तमपुर ढाला से दक्षिण की ओर जाने वाले मार्ग की सभी गलियां, बघेल गली, अंसारी गली, धोबी गली, मौर्या गली, सुधाकर गली समेत अन्य स्थान नालियों के पानी से लबालब दिखे।
कई लोगों ने दावा कि वे पिछले दो दिन से नहा नहीं रहे हैं, क्योंकि पानी गिरेगा तो सड़क का नाला और उफनाएगा। दुर्गा मंदिर जाने वाले मार्ग पर भी जलभराव से श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पार्षद ने कहा कि सिक्सलेन पर नाला निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने जलनिकासी बाधित कर रखी है।
डीजल बचाने के लिए पंप पूरी क्षमता पर नहीं चल रहे हैं। काम की रफ्तार भी काफी धीमी है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 की टीम कभी भी गोरखपुर का दौरा कर सकती है। जलभराव की यह बदहाल स्थिति शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।