गोरखपुर। एम्स में चल रहे आंतरिक विवाद के मसले पर सदर सांसद रवि किशन शुक्ल ने बुधवार को एम्स के प्रशासनिक भवन पहुंच कर कार्यकारी निदेशक जीके पॉल व वरिष्ठ डाक्टरों के साथ बैठक की। 23 बिंदुओं का सवाल बनाकर कार्यकारी निदेशक को दिया और दो दिन में लिखित जवाब मांगा। उन्होंने बैठक से ही स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को फोन किया और मामले की जानकारी दी। फिर उनका संदेश सभी को सुनाया।
सांसद ने कहा कि कार्यकारी निदेशक का जवाब स्वास्थ्य मंत्री को भेजूंगा, जो भी दोषी होगा दंड मिलना तय है। सांसद ने कहा सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को जो भी क्षति पहुंचाएगा दंड का भागी होगा। सांसद ने कहा कि एम्स में रोगियों का अच्छा इलाज संस्थान की गरिमा को बढ़ाएगा। डाक्टरों के बीच विवाद नहीं होना चाहिए। इससे गलत संदेश जाता है। एम्स किसी की निजी संपत्ति नहीं है। यह सभी का है। इसलिए सभी मिलकर इसे आगे बढ़ाने में जुटे रहें। सांसद ने कहा कि सभी रोगियों का इलाज किया जाए और अनावश्यक किसी को रेफर न किया जाए। गड़बड़ी मिलने पर जांच कर जिम्मेदारों पर तत्काल कार्रवाई की जाए ताकि परिसर में समस्याओं का समाधान हो सके। उन्होंने कहा यह एम्स की परंपरा नहीं। इसपर विराम लगना चाहिए।
बैठक में डा. अजय भारती, डा. हरिशंकर जोशी, डा.महिमा मित्तल, डा. शिखा सेठ, डा.हीरा भल्ला, डा.सुबोध पांडेय, डा.सुनील गुप्ता, डा. अरूप मोहंती, डा. वैंकटेश मौजूद रहे।
एम्स में पहली बार शुरू हुई ऑडिट
गोरखपुर। एम्स में पहली बार ऑडिट शुरू हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर टीम ने मंगलवार से ऑडिट शुरू कर दी है, जो 24 सितंबर तक चलेगी। इसमें हर बिंदुओं की पड़ताल की जा रही है। ऑडिट टीम ने एम्स प्रशासन से कई फाइलों को मांगा है। कार्यकारी निदेशक व मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रो. गोपाल कृष्ण पाल ने कहा कि मंत्रालय की आंतरिक ऑडिट शुरू हो गई है।
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छिपाई गई लाइसेंस आवेदन निरस्त की जानकारी
गोरखपुर। एम्स में कैंटीन का संचालन करने वाली पुष्पा फूड कंपनी ने लाइसेंस का आवेदन निरस्त होने की जानकारी छुपा ली थी। एम्स प्रशासन इसकी भी जांच करा रहा है। कंपनी ने दोबारा लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। कार्यकारी निदेशक व मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रो. गोपाल कृष्ण पाल ने कहा कि पूरी व्यवस्था दुरुस्त कराकर जल्द ही कैंटीन का संचालन शुरू कराया जाएगा।
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गार्डों के दुर्व्यवहार पर सांसद नाराज
गार्डों के मरीजों संग किए जा रहे लगातार दुर्व्यवहार पर सदर सांसद ने नाराजगी जगाई। उन्होंने कहा कि गार्ड एम्स का पहला डाक्टर होता है। उसे हर मरीज से अदब व प्यार से पेश आना चाहिए। एम्स में मौजूद दो एम्बुलेंस के उचित एंव सामयिक प्रयोग नहीं किए जाने पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने निर्देशित किया कि आवश्यकतानुसार मरीजों को एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जाय।
उपकरण खरीद, डिग्री प्रकरण, कैंटीन का मुद्दा उठा
सांसद रविकिशन ने एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल से लंबी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने एम्स में मरीजों के इलाज में हो रही लापरवाही, उपकरणों की खरीद, डॉक्टरों के बीच चल रहे विवाद, ईडी के बेटे के डिग्री प्रकरण का विवाद, एम्स परिसर में पेड़- पौधे, एम्स में चल रहे भ्रष्टाचार, कैंटीन की घटना सहित 23 बिंदुओं पर ईडी से जल्द से जवाब मांगा है। उन्होंने पूछा कि जब कैंटीन संचालन का लाइसेंस नहीं मिला था, तो उसका संचालन कैसे किया गया। उन्होंने कहा एम्स में हो रही घटनाओं के कारण अक्सर मरीज एवं प्रशासन के कारण परेशान लोग उनके आवास पर न्याय की मांग के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल इलाज का स्थान होता है। यहां मरीज को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। लोगों के इस प्रकार जाने से एम्स की छवि खराब हो रही है। ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगना चाहिए।