गोरखपुर। मिट्टी में नमी, पानी की कमी और प्रकाश स्तर गड़बड़ाने से पौधों में होने वाले बदलाव का संदेश अब किसानों को पहले ही मोबाइल पर मिल जाएगा। इससे पौधे के खराब होने से पहले वह कमी को दूर करने का प्रयास शुरू कर देंगे। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. के सुनीता ने ऐसा एआई उपकरण तैयार किया है, जो इसका डेटा एकत्रित कर सीधे उपयोगकर्ता के मोबाइल एप के जरिए अलर्ट भेजेगा। करीब एक साल के शोध के बाद उनके द्वारा एआई उपकरण के डिजाइन को इंडिया स्तर पर पेटेंट मिला है।
खेत की मिट्टी में नमी और वातावरण में आर्द्रता की कमी से आमतौर पर देखा जाता है कि पौधे कमजोर होने लगते हैं। खेत में नमी के लिए जबतक किसान सतर्क होते हैं, तब तक पौधे काफी कमजोर हो जाते हैं। काफी प्रयास के बाद भी उनमें वह मजबूती नहीं आ पाती। इसका असर फसल के पैदावार पर पड़ता है।
इसकी आवश्यकता को देखते हुए वनस्पति विज्ञान विभाग की शिक्षिका डॉ. के सुनीता ने शोध कर एक एआई उपकरण तैयार किया, जो पौधे के तनाव को मापने के काम आएगा। यह उपकरण मॉनीटरिंग करेगा की मिट्टी की नमी कैसी है, तापमान कैसा है, आर्द्रता और प्रकाश स्तर का डेटा संग्रह करके लगातार डाटा एकत्रित करेगा। कमी होने पर इस उपकरण से जुड़े मोबाइल एप पर अलर्ट भेजेगा। यह उपकरण पौधे की वातावरण का संपूर्ण प्रोफाइल बनाता है और मशीन लर्निंग एल्गोरिथम का उपयोग करके डाटा का विश्लेषण करता है।
इससे तनाव के कारकों की पहचान होती है, जैसे कि सूखा, पोषक तत्वों की कमी या किट आदि। अलर्ट मिलने के बाद किसान या उपयोगकर्ता को अपने पौधे के विशेष आवश्यकताओं को समझने में मदद मिलती है।
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इंडिया लेबल पर हुआ पेटेंट
उनके द्वारा तैयार इस उपकरण की तैयार डिजाइन को इंडिया लेबल पर पेटेंट के लिए भेजा गया। वहां पर उनके इस उपकरण को पेटेंट प्राप्त हुआ। इसके बाद अब इसे इंडस्ट्री के साथ मिलकर डेवलप किया जाएगा, ताकि इसका लाभ आमजन को मिल सके।
एआई बेस्ड प्लांट स्ट्रेस डिटेक्टिंग डिवाइस
डॉ. के सुनीता ने बताया कि यह एआई बेस्ड प्लांट स्ट्रेस डिटेक्टिंग डिवाइस उपकरण है। यह एआई विश्लेषण अलर्ट के द्वारा तनाव का पता चलने पर उपयोगकर्ताओं को मोबाइल एप के माध्यम से अलर्ट भेजता रहेगा। जैसे कि पानी देना है या खाद डालना है, और स्मार्ट सिंचाई सिस्टम या ग्रो लाइट के साथ एकत्रित किया जा सकता है, ताकि पौधे की आवश्यकता अनुसार स्थिति को स्वचालित रूप से समायोजित किया जा सके। उपकरण समय के साथ परिवर्तन को ट्रैक करता है, ताकि उपयोगकर्ताओं को अपने पौधे के विशेष आवश्यकताओं को समझने में मदद मिलती है। यह प्रणाली शौकिया और पेशेवर दोनों प्रकार के पौधों को ट्रैक करने में सक्षम है।
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मॉडर्न किसानों के लिए लाभकारी होगा यह उपकरण
बेलीपार कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक सतीश कुमार सिंह ने कहा कि पोषक तत्वों की कमी की जानकारी के लिए बॉयोलेबरेट्री में जांच कराना पड़ता है। यह एआई बेस्ड उपकरण नमी और आर्द्रता के साथ पोषक तत्वों की जानकारी देगा। निश्चित तौर पर यह कृषि के क्षेत्र में लाभकारी साबित होगा। हालांकि हमारे यहां आज भी किसान पुरातन पद्धति पर ही निर्भर रहते हैं। वह अपने अनुभवों के आधार पर खेती करते हैं। इस उपकरण का लाभ मॉडर्न किसान उठा सकेंगे।