एम्स, गोरखपुर में कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल के बेटे के ओबीसी सर्टिफिकेट के फर्जी होने की शिकायत और डॉ. के सतीश रवि की नियुक्ति में फर्जी प्रमाण पत्र की जांच के लिए आई स्वास्थ्य मंत्रालय की विजिलेंस टीम ने शुक्रवार पूरे दिन जानकारियां जुटाई।
टीम ने कई प्रोफेसर और कर्मचारियों से बातचीत की। शिकायतकर्ता डॉ. गौरव से भी टीम ने पूछताछ की और दोनों मामलों से जुड़े संबंधित दस्तावेज लेकर पटना रवाना हो गई। अब जांच टीम पटना एम्स में भी जांच पड़ताल करेगी।
बीते 30 अगस्त को माइक्रोबायोलॉजी विभाग में पीजी की खाली सीट पर डॉ. ओरो प्रकाश पाल ने दाखिला लिया था। उन्होंने जाति प्रमाण पत्र में वार्षिक आय आठ लाख रुपये दर्शाए थे। इस पर सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने आपत्ति उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।
साथ ही एम्स थाने में तहरीर भी दी थी। इस प्रकरण की जांच स्वास्थ्य मंत्रालय की बिजनेस टीम कर रही है। इसके अलावा पटना जिला प्रशासन भी इस प्रकरण की अलग से जांच कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय से आई तीन सदस्यीय विजिलेंस टीम बृहस्पतिवार से ही एम्स परिसर में घूम रही थी।
शुक्रवार को टीम ने कई डॉक्टरों और कर्मचारियाें से जानकारियां जुटाई। डॉ. औरों प्रकाश पाल प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेज और अन्य संबंधित अभिलेखों की पड़ताल करने के बाद टीम पटना के लिए रवाना हो गई। जांच टीम पटना जिला प्रशासन से संपर्क करेगी और जाति प्रमाणपत्र से संबंधित अन्य दस्तावेज जुटाएगी। सूत्रों की मानें तो टीम एम्स पटना भी जाएगी, जहां कार्यकारी निदेशक डॉक्टर जीके पाल की पुत्री सेवारत हैं, उनके सर्टिफिकेट की भी जांच करेगी।