सरदारनगर। चौरीचौरा नगर पंचायत के वार्ड नंबर चार निवासी प्रियांशी गुप्ता के इंटरमीडिएट में कम नंबर आने पर ट्रेन आगे कूदकर जान देने की घटना ने परिवार की बची-खुची खुशियां भी समाप्त कर दीं। परिजनों की चित्कार से मौके पर गए लोगों की आंख भर आई। कुछ वर्ष पहले छात्रा के भाई ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
परिजन उस हादसे से उबरे ही थे कि छात्रा की आत्महत्या के बाद पूरा परिवार सदमे में आ गया। नगर पंचायत वार्ड नंबर चार निवासी शंभु गुप्ता दिल्ली में रहकर कपड़ा सिलाई का कार्य करते हैं। बेटी प्रियांशी पढ़ने में बहुत तेज थी। पड़ोसियाें ने बताया कि घर पर मां-बेटी ही रहती थीं।
प्रियांशी गुप्ता महादेव प्रसाद इंटर कॉलेज की छात्रा थी। वह पढ़ने के साथ-साथ एक कोचिंग सेंटर में छोटे बच्चों को पढ़ाती भी थी। उसका सपना आईएएस अधिकारी बनने का था। शुक्रवार को परिणाम घोषित होने के बाद कम नंबर देख वह अवसाद में चली गई। बेटी की मौत की खबर सुनकर मां बार-बार अचेत हो जा रही थी।
उपस्थित महिलाएं पानी का छींटा मारकर उसे होश में ला रही थीं। पड़ोसियों ने बताया कि प्रियांशी के भाई ने भी कुछ साल पहले आत्महत्या कर ली थी। बड़ी मुश्किल से यह परिवार संभल रहा था। छात्रा की मौत के बाद आसपास के घरों में चूल्हे नहीं जले।
बोले प्रधानाचार्य : नंबर नहीं, जीवन महत्वपूर्ण
लेडी प्रसन्न कौर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डाॅ. दिनेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि नंबर नहीं जीवन महत्वपूर्ण है। लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहना चाहिए, सफलता जरूर मिलेगी। अगर अंक कम आ गए या नतीजे खराब रहे तो जीवन तो खत्म नहीं हो जाता। अपने आत्मबल को बढ़ाना चाहिए। जीवन में उतार-चढ़ाव आता रहता है।
सफलता के लिए कक्षा के नंबर से अधिक संघर्ष महत्वपूर्ण है। कई खिलाड़ी, अभिनेता, गायक, कारोबारी, कलाकार, लेखक, साहित्यकार और वैज्ञानिक तक पढ़ाई में औसत रहे हैं। अव्वल दर्जे में नहीं आए, फेल भी हुए। स्नातक, स्नातकोत्तर की डिग्री भी नहीं ली, फिर भी अपने जुनून से जीवन में बड़ी सफलताएं पाईं। युवाओं को एक हार से निराश होने के बजाय संघर्ष का रास्ता सीखना चाहिए:
हीरालाल, प्रधानाचार्य, गंगा प्रसाद स्मारक इंटर काॅलेज