शहर के 15 हजार भवन स्वामियों का संपत्ति कर का बोझ कम नहीं हुआ है। उनको 2021-22 से ही जीआईएस सर्वेक्षण के आधार पर बढ़ा हुआ संपत्ति कर जमा करना होगा। पिछले महीने बोर्ड की बैठक में हुआ फैसला इनपर लागू नहीं होगा।
नगर निगम में ऐसे तमाम लोग आपत्ति लेकर पहुंच रहे हैं।
उनका कहना है कि उनसे 2021-22 से ही जीआईएस सर्वेक्षण के आधार पर संपत्ति कर लिया जा रहा है। जबकि बोर्ड की बैठक में इसे निरस्त किया गया था। 10 जुलाई को हुई नगर निगम बोर्ड की बैठक में जीआईएस सर्वेक्षण के तहत वर्ष 2021-22 और 2022-23 का बिल स्थगित किया गया था।
दरअसल, नगर निगम का कहना है कि बोर्ड की बैठक से पहले करीब 15 हजार संपत्तियों को जीआईएस आधारित बिल भेज दिया गया था। इसपर बोर्ड का फैसला लागू नहीं हो सकता। उन्हें पिछले दो वर्षों का भी बिल जमा करना होगा। वहीं, अब जो नोटिस जारी किए जा रहे हैं, उसमें 2023-24 से जीआईएस सर्वेक्षण आधारित संपत्ति कर लिया जाएगा।
दिग्विजय नगर के पार्षद एवं पूर्व उपसभापति ऋषि मोहन वर्मा समेत कई अन्य पार्षद इस मामले में आपत्ति दर्ज करा चुके हैं, लेकिन नागरिकों को कोई राहत नहीं मिली। पार्षद ऋषि मोहन वर्मा ने 30 जुलाई 2024 को ही अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा को पत्र देकर कहा था कि कार्यकारिणी और बोर्ड बैठक के बाद भी जीआईएस सर्वे के तहत तीनों वित्तीय वर्ष का टैक्स जोड़कर बिल भेजा जा रहा है।
अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा ने कहा कि बोर्ड की बैठक में यह फैसला हुआ था कि जीआईएस सर्वेक्षण आधारित संपत्ति कर 2023-24 से वसूला जाएगा। लेकिन इसके पहले करीब 15 हजार संपत्तियों का डिमांड नोटिस भेज दी गई थी।
उनका संपत्ति कर कम नहीं हो सकता। अब जिन भवनों की नोटिस जाएगी, उसमें 2023-24 से बढ़ा हुआ संपत्ति कर लिया जाएगा। बोर्ड के फैसले के बाद इस प्रस्ताव को शासन में भेजा गया है, वहां से जो निर्देश आएंगे उसके अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।