गोरखपुर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक न्यायालय कक्ष में अधिवक्ता के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार के मामले में बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट गोरखपुर ने विरोध जताया है। एसोसिएशन ने इलाहाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और मंत्री को पत्र भेजकर संबंधित न्यायमूर्ति का किसी अन्य उच्च न्यायालय में स्थानांतरण करने की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष उमापति उपाध्याय और मंत्री अनुज अस्थाना की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग हैं। न्यायालय की गरिमा, अधिवक्ताओं का सम्मान और न्यायिक मर्यादाओं का संरक्षण स्वस्थ न्याय व्यवस्था के अनिवार्य आधार हैं। न्यायालय कक्ष में अधिवक्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए, ताकि न्यायिक व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे। पत्र में कहा गया है कि न्यायालय और अधिवक्ता एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों का साझा उद्देश्य न्याय की गरिमा बनाए रखना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है। एसोसिएशन ने अधिवक्ताओं के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमा की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने की बात भी कही है।