डिब्रूगढ़-चंडीगढ़ एक्सप्रेस के बेपटरी होने के कारणों की सीआरएस ने जांच शुरू कर दी है। इस बीच रेल कर्मचारियों में इस बात को लेकर चर्चा होने लगी है कि पटरी कमजोर होना भी हादसे की एक वजह हो सकती है। चर्चा है कि इस खंड के कीमैन ने पटरी कमजोर होने की बात कही थी, लेकिन अफसर नहीं चेते।
जिम्मेदारों द्वारा इस पर जल्द ही ब्लॉक लेकर मेंटनेंस कार्य की भी बात कही जा रही थी, लेकिन सारी बातें मौखिक ही थीं। इसी वजह से जब एक्सप्रेस ट्रेन गुजरी तो उस पर गति नियंत्रण के लिए न तो कोई उपाय किए गए थे और न ही कोई संकेतक ही लगा था। लोको पायलट को खतरे का अहसास नहीं हुआ और वह फुल स्पीड के साथ आगे बढ़ा।
चर्चा है कि सीआरएस की जांच रिपोर्ट आने पर इससे जुड़े कई जिम्मेदारों पर गाज गिरनी तय है। हालांकि रेलवे के अफसर अभी इस मामले पर कुछ भी कहने से साफ बच रहे हैं। अफसरों का कहना है कि यह चर्चाएं केवल पूर्वानुमान पर आधारित हैं।रेलवे अपने ट्रैकों की नियमित निगरानी कराता है।
गोंडा-मनकापुर रेलखंड पर भी मानक के अनुसार 4 किलोमीटर पर एक कर्मचारी की तैनाती है जो हर दिन सुबह हथौड़ा लेकर पैदल निकलता है और हर प्वाइंट को चेक करता है। अगर उसे किसी जगह भी कोई आशंका या ऐसी वस्तु दिखती है, जो हादसे की वजह हो सकती है तो उससे अफसरों को अवगत कराता है। अंग्रेजों के जमाने का यह नियम आज भी बदस्तूर है।
बृहस्पतिवार को भी पैदल कर्मी ने ट्रैक का निरीक्षण किया था। इसके बाद मशीन से भी पटरी की क्षमता का आकलन किया गया। ट्रैक की जांच करने वाले पैदल कर्मी ने पटरी को कमजोर बताया था, लेकिन उस पर किसी जिम्मेदार ने ध्यान नहीं दिया और ट्रेन पटरी से उतर गई।
तीन घंटे देर से आई गोरखधाम एक्सप्रेस
गोंडा-मनकापुर रेलखंड को शुक्रवार देर रात ही रिस्टोर कर दिया गया था। इसके चलते शनिवार से सभी ट्रेनें अपने निर्धारित समय से चल रही हैं। बृहस्पतिवार को बठिंडा गई गोरखधाम एक्सप्रेस गोरखपुर से लखनऊ के बीच ही करीब चार घंटे देर हो गई थी। इस वजह से शुक्रवार को बठिंडा से भी यह ट्रेन लेट से चली। शनिवार को जिस ट्रेन को सुबह 9:45 बजे गोरखपुर स्टेशन पर पहुंचना था, वह दोपहर करीब दो बजे पहुंची।