संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। भगवान के चरित्र उनके लिए तो लीला होती है। पर, हमारे लिए शिक्षा होती है। ये बातें वृंदावन से आए संत रामानंद ने कही।
वे सोमवार को गीता जयंती पर गीता प्रेस में आयोजित सत्संग-प्रवचन में श्रोताओं को कथा सुना रहे थे। कथाव्यास ने नारद की कथा सुनाते हुए कहा कि एक बार नारदजी ने समाधि लगाई। इंद्र देखकर डर गए कि कहीं तप के बल पर वह हमारी पदवी ना छीन लें। यह सोचकर उन्होंने अप्सराओं और कामदेव को भेज कर तपस्या भंग करवानी चाहिए, लेकिन नारदजी विचलित नहीं हुए और न ही क्रोधित हुए।