इसी साल गीता प्रेस ने 100 वर्ष पूरे किए हैं। बता दें कि गीता प्रेस की स्थापना करने वाले चूरू राजस्थान के रहने वाले जयदयालजी गोयंदका (सेठजी) गीता-पाठ, प्रवचन में बहुत रुचि लेते थे। व्यापार के सिलसिले में उनका कोलकाता आना-जाना होता रहता था। वहां वह दुकान कि गद्दियों में भी सत्संग किया करते थे। धीरे-धीरे सत्संगियों की संख्या इतनी बढ़ गई कि जगह की समस्या खड़ी होने लगी। इसपर उन्होंने कोलकाता में बिड़ला परिवार के एक गोदाम को किराए पर लिया और उसका नाम रखा गोविंद भवन।
गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ लाल मणि त्रिपाठी के मुताबिक, कोलकाता में वणिक प्रेस के संचालक की टिप्पणी को जयदयाल जी गोयंदका ने ईश्वर का संदेश माना। मदद की गोरखपुर के साहबगंज निवासी सेठ घनश्यामदास और महावीर प्रसाद पोद्दार ने। 10 रुपये महीने के किराए पर हिन्दी बाजार में 29 अप्रैल 1923 में प्रेस की स्थापना हुई। जरूरत के साथ 1926 में वर्तमान गीताप्रेस की जमीन खरीदी गई जो दो लाख वर्ग फिट में है।
सियासी बयानबाजी भी शुरू
इस बीच कांग्रेस ने गीता प्रेस को पुरस्कार दिए जाने की आलोचना की। पार्टी ने इसे ‘उपहास’ बताया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 2021 के लिए गांधी शांति पुरस्कार गोरखपुर में गीता प्रेस को दिया जा रहा है, जो इस वर्ष अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। इस पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस को ‘हिंदू विरोधी’ करार दिया और लोगों से सवाल किया कि गीता प्रेस पर उसके हमले से क्या कोई हैरान है?