गोरखपुर। मोहद्दीपुर के रहने वाले राजेंद्र सिंह को कई दिन से पैर में दर्द है। डॉक्टर ने कैल्शियम, विटामिन के साथ गैस के लिए भी दवा लिखी। उन्होंने पूछा तो बताया गया कि इन दवाओं के खाने से गैस भी बनेगी, इसलिए डॉक्टर ने एहतियात में लिखी होगी। दवा विक्रेता अरविंद बताते हैं कि अब हर 10 में से आठ पर्चे पर गैस या विटामिन में से एक दवा जरूर लिखी होती है।
आरएमआरसी ने देश के 10 बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों के पर्चा पर दवा लिखने के तरीकों का जो अध्ययन किया है, उससे आम आदमी हर दिन जूझ रहा है। मरीज रोग कोई बताए, डॉक्टर एक झटके में दवाएं लिखते चले जाते हैं। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में तो वह यह समझना भी नहीं चाहते कि मरीज की दिक्कत किस वजह से है। वहीं निजी चिकित्सक भी धड़ल्ले से हर पर्चे पर गैस व विटामिन की दवाएं लिख रहे हैं।
दवा विक्रेता अशोक बताते हैं कि इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अब गैस्ट्रिक की बीमारी आम है और कुछ एंटीबायोटिक दवाएं खाने पर गैस बनती भी है। इसलिए डॉक्टर भी आराम से खाली पेट गैस की दवा लिखते हैं। चूंकि इनमें कई ब्रांड की दवाएं हैं, जो महंगी बिकती हैं, लिहाजा कमीशन भी अच्छा मिलता है। इसलिए मेडिकल स्टोर संचालक, दवा कंपनियों के प्रतिनिधि भी डॉक्टर को ऐसी दवाएं लिखने को प्रेरित करते हैं। इन दवाओं का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर कम ही होता है, लिहाजा यह धंधा बड़े आराम से मुनाफा देता है।
अधोमानक मिल चुकी हैं ये दवाएं
पिछले दिनों जिले में दवाओं के सैंपल की जांच में एक बड़ा खुलासा यह हुआ कि गैस की चार दवाएं अधोमानक हैं। मतलब इनमें साल्ट की मात्रा निर्धारित मानक से कम है, लेकिन लंबे समय से ये दवाएं मार्केट में बिक रही हैं। आश्चर्यजनक यह है कि इस आदत पर नियंत्रण के लिए न तो स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई की गई है और न ही खाद्य औषधि प्रशासन ही कुछ कर रहा है। ड्रग इंस्पेक्टर जय कुमार सिंह का कहना है कि जो दवाएं अधोमानक पाई गई हैं, उनकी मार्केट से वापसी के लिए पत्र भेजा गया है।
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