गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों ने मंगलवार रात में जिन मरीज माफिया को पकड़कर झुगियां के नर्सिंग होम का मामला खोला था, उसके पीछे पहले गैंगस्टर में पाबंद किए जा चुके तीन आरोपी ही निकले। तीनों सत्यम हॉस्पिटल प्रकरण के बाद नाम बदलकर नर्सिंग होम चला रहे थे। इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के सुराग भी मिले हैं। तहरीर न मिलने से बच रहे आरोपियों का मामला खुलने पर अफसरों ने शिकंजा कसवाया तो पूरा खेल खुला। अब पुलिस फिर से इन पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।
पुलिस की छानबीन में पता लगा है कि कुछ समय पहले सत्यम हॉस्पिटल मामले में जिस गिरोह पर पुलिस ने गैंगस्टर की कार्रवाई की थी, उसी के सदस्य सत्यम, मनीष और रंजीत निषाद ही इस नर्सिंग होम के भी पार्टनर हैं। उधर, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मरीज माफिया गिरोह के एक सदस्य को पकड़ कर अपनी पीठ तो थपथपा ली थी, लेकिन 82 घंटे में पुलिस के कई बार संपर्क करने के बाद भी तहरीर नहीं दी। इस वजह से आरोपी बच गया। तहरीर नहीं मिलने से पुलिस ने आरोपी का बस शांतिभंग में चालान कर दिया। हालांकि, बताया जा रहा है कि पुलिस ने आरोपी से इन तीनों दिनों में काफी सूचनाएं एकत्रित की हैं, जिससे मरीज माफियाओं के खिलाफ आगे की कार्रवाई में मदद मिलने की उम्मीद है।
दरअसल, मंगलवार रात में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बेतिया (बिहार) के वाल्मिकी नगर के रमेश मौर्य को पकड़ा था। दावा किया गया कि यह मरीज को बरगला कर निजी नर्सिंग होम ले जाता है। पुलिस को सुपुर्द करने के साथ ही उसने अपनी पीठ थपथपा ली। कॉलेज प्रशासन ने बताया कि एक महिला नर्स को मरीज बनाकर संपर्क किया गया और जब आरोपी आया तो उसे पकड़ लिया लेकिन जब तहरीर देने की बारी आई तो कॉलेज प्रशासन ने अपने कदम पीछे कर लिए। अब तक पुलिस के सामने जितने भी मामले आए हैं, उनमें पुलिस या तो मरीज के तीमारदार या फिर सीएमओ दफ्तर से मिली तहरीर के आधार पर ही केस दर्ज करती है, क्योंकि यह टेक्निकल मामला होता है। लेकिन, इस मामले में पुलिस ने तेजी पकड़ी और जांच में कई खुलासे भी कर डाले। एक स्वास्थ्य अफसर के घूस लेने, सिपाही के शामिल होने जैसे तथ्य भी आ गए लेकिन तहरीर न मिलने की वजह से सब कुछ आरोपी के पक्ष में हो गया। कल तक नर्सिंग होम बंद कर फरार अस्पताल संचालक को भी तहरीर न मिलने की जानकारी मिली तो उसने पंजीकरण का पत्र भेज दिया। पुलिस ने मरीज खोना लेकिन उसकी जानकारी भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नहीं दी और अंत में आरोपी मरीज माफिया का शांतिभंग में चालान हो गया और वह छूट गया।
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पुलिस के रडार पर पांच संदिग्ध
मेडिकल कॉलेज की ओर से कोई तहरीर न आने पर पुलिस ने आरोपी का शांतिभंग में चालान तो कर दिया लेकिन उससे पूछताछ में पुलिस को मरीज माफिया गिरोह में शामिल पांच संदिग्ध लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस अब ऐसे मरीजों की तलाश में है, जिसे मेडिकल कॉलेज से बरगला कर नर्सिंग होम तक लाया गया था। अगर ऐसे मरीज मिल जाएंगे तो पुलिस उनके तीमारदार की तहरीर लेकर केस दर्ज कर पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर लेगी।
आरोपी से पूछताछ के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। गिरोह में शामिल लोगों के खिलाफ सबूत जुटाया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से पुलिस को तहरीर नहीं मिली। इस वजह से आरोपी का शांतिभंग में चालान कर दिया गया।
कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी सिटी