गोरखपुर। उर्दू भाषा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। इस दौर में उर्दू के विकास के लिए ऑनलाइन संसाधनों का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे में उर्दू भाषा का भविष्य उज्ज्वल है।
ये बातें शिब्ली नेशनल पीजी कॉलेज आजमगढ़ के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. अलाउद्दीन खान ने कहीं। वह साजिद अली मेमोरियल कमेटी की ओर से एमएसआई इंटर कॉलेज बक्शीपुर में आयोजित तीन दिवसीय जश्न-ए-उर्दू कार्यक्रम के दूसरे दिन रविवार को ''मोहम्मद हामिद अली एक खादिम-ए-उर्दू'' विषय पर परिचर्चा में विचार व्यक्त कर रहे थे।
अध्यक्षता करते हुए वासिफ फारूकी ने कहा कि इल्मो अदब की जमीं गोरखपुर से उर्दू की तरक्की के लिए काम किया जा रहा है। मोहम्मद हामिद अली सिर्फ इस चाहत के साथ जीते रहे कि उर्दू पढ़ी जाए, लिखी जाए और बोली जाए।
गुरुद्वारा कबीर साहब मगहर की प्रशासक बीबी परमजीत कौर राना ने कहा कि मोहम्मद हामिद अली ने उर्दू के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. सौरभ पांडेय ने कहा कि उर्दू भाषा में जोड़ने की क्षमता मौजूद है। कमेटी के सचिव महबूब सईद हारिस ने कहा कि उर्दू का विकास तहजीब का विकास है और इसकी तालीम तरक्की के लिए जरूरी है।
मुजफ्फरुल्लाह खान ने कहा कि मोहम्मद हामिद अली को उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए हमेशा याद किया जाएगा। इस दौरान शायर वासिफ फारूकी और डॉ. अलाउद्दीन खान को सम्मानित किया गया। संचालन मो. फर्रूख जमाल ने किया।
इस मौके पर काजी तवस्सुल हुसैन, डाॅ. तारिक सईद, मोहम्मद हाशिर अली, असीम वारसी, शमसुल इस्लाम, जफर अहमद खां, आसिफ सईद, मोहम्मद शरीक अली, डॉ. एहसान अहमद, तरन्नुम हसन आदि मौजूद रहे।