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Gorakhpur News: नए बिजली उपकेंद्र का हुआ भौतिक सत्यापन

Thu, 21 Sep 2023 11:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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आईपीडीएस योजना : बक्शीपुर में बने नए बिजली उपकेंद्र में ढाई करोड़ रुपये से भवन और 10 एमवीए का ट्रांसफाॅर्मर लगाया गया था
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0- भवन निर्माण कार्यदायी फर्म की तरफ से कराया गया था जबकि ट्रांसफाॅर्मर निगम की तरफ से लगा था
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। समेकित ऊर्जा विकास योजना (आईपीडीएस) के तहत बक्शीपुर खंड में बने नए बिजली उपकेंद्र में किए गए कामों का भौतिक सत्यापन व निरीक्षण शासन की टीम ने बुधवार को किया। करीब ढाई करोड़ रुपये से भवन और बिजली उपकेंद्र का ट्रांसफॉर्मर (10 एमवीए) लगाया गया है। निरीक्षण कर फाइलों का सत्यापन किया गया।
टीम ने बक्शीपुर इलाके में बिछाए गए भूमिगत केबल की जांच की। सूत्रों ने बताया कि टीम ने अलीनगर समेत आसपास के इलाके में भूमिगत केबल की गहराई देखी। केबल की जांच की। इसके अलावा मारवाड़ इंटर कॉलेज के पास आईपीडीएस योजना के तहत लगाए गए ट्रांसफाॅर्मर की जांच कर भौतिक सत्यापन किया। इसके बाद टीम राप्तीनगर खंड की तरफ चली गई। यहां मानबेला बिजली उपकेंद्र के अलावा भूमिगत केबल का भौतिक परीक्षण किया गया।
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दरअसल, मंडल में पांच आईपीडीएस टाउन घोषित किए गए थे। इन खंडों में गोरखपुर मंडल में कुल 356 करोड़ रुपये से अलग-अलग काम कराए गए थे। इसमें नए उपकेंद्र बनाए जाने से लेकर फीडर का बंटवारा, नए फीडर बनाए जाने का काम, एबीसी लाइन, भूमिगत केबल, कैपेसिटर बैंक, सीमा मीटर, डीटी मीटर, एचटी लाइन, एलटी लाइन और सोलर पैनल के काम किए गए थे।
ये हैं पांच आईपीडीएस टाउन
गोरखपुर शहरी और ग्रामीण, कुशीनगर, देवरिया, महाराजगंज में भूमिगत केबल में ही नप गए थे अभियंता
आईपीडीएस योजना में गोलघर समेत पुर्दिलपुर इलाके में भूमिगत केबल का काम कराया गया था। स्थानीय पार्षद मनु जायसवाल ने तत्कालीन विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल से भूमिगत केबल के कराए जा रहे काम में लापरवाही किए जाने की शिकायत की थी। जांच की गई तो प्रथमदृष्टया तीन अभियंताओं के पर्यवेक्षणीय काम में लापरवाही पाई गई। शासन की इस बड़ी योजना में लापरवाही मिलने पर तीनों अभियंताओं को निलंबित कर दिया था। कुछ दिनों बाद फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था।
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कोट
शासन की टीम भौतिक सत्यापन कर रही है। आईपीडीएस की तरफ से ये काम पांच आईपीडीएस टाउन में कराए गए थे। इन्हीं कामों को लेकर शासन की तरफ से भौतिक सत्यापन करवाया जा रहा है। सत्यापन प्रक्रिया में अभियंता अपने स्तर से पूरा सहयोग करेंगे।
-आशु कालिया, मुख्य अभियंता
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