रामगढ़ताल में मछलियों के मरने का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। मछुआरों ने उतराई करीब पांच क्विंटल मछलियों को जाल डालकर निकाला। उधर, गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन के निर्देश पर रविवार को जीडीए के संपत्ति विभाग के अधिकारियों और अभियंताओं की एक टीम ने ताल का स्थलीय निरीक्षण भी किया। टीम अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सोमवार को उपाध्यक्ष को कार्यालय में देगी।
रविवार को स्मार्ट व्हील के पीछे, कुनरघाट, पैड़लेगंज, सहारा एस्टेट गेट तथा देवरिया-गोरखपुर फोरलेन के पास ताल क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैली रही। इन स्थानों पर ताल की सतह और तल पर गाढ़ी परत जमी हुई देखी गई। पैडलेगंज के समीप ताल किनारे गंदगी फैला हुआ था, जिसे शाम को एक नाव पर सवार दो कर्मचारी हटाते देखे गए।
मत्स्यजीवी सहकारी समिति के अध्यक्ष मदन लाल ने बताया कि जहां बदबू ज्यादा है, वहीं मछलियों की मौत की संख्या भी अधिक है। यह स्पष्ट संकेत है कि पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिर रहा है।
समिति के पदाधिकारियों राजेश कुमार, अमन और सुग्रीव का कहना है कि रामगढ़ताल से पानी की निकासी के लिए पाम पैराडाइज की ओर बना स्लुइस गेट महीनों से बंद है। लेक क्वीन क्रूज के संचालन को लेकर गेट नहीं खोले जाने से ताल में पानी का ठहराव बढ़ गया है, जिससे जैविक प्रदूषण की मात्रा लगातार बढ़ रही है। सचिव बलदेव कुमार साहनी ने बताया कि पिछले दो दिनों में करीब पांच क्विंटल मछलियों की मौत हुई है।
मत्स्यजीवी सहकारी समिति ने मांग की है कि ताल के पानी की तत्काल वैज्ञानिक जांच कराई जाए और प्रदूषण कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि रामगढ़ताल की जलीय जीवन व्यवस्था को बचाया जा सके। उनका कहना है कि सिक्टौर पुलिया के पास पानी के बहाव का रास्ता बंद कर दिया गया है, जिससे पानी का प्रवाह रुक गया है और ताल का पानी स्थिर हो गया है। पानी के ठहराव के कारण ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा है।