भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद ने पंजीकरण के लिए दिया 30 दिनों का समय
इसके बाद शुरू की जाएगी जांच और होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अब भूगर्भ जल का व्यावसायिक उपयोग करने पर भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद से अनापत्ति सर्टिफिकेट (एनओसी) लेना होगा। बिना एनओसी लिए भूगर्भ जलदोहन करने वालों पर दो लाख से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। साथ ही छह महीने से एक साल तक की जेल भी हो सकती है। भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद ने एनओसी के लिए एक महीने का समय दिया है। इसके बाद विभाग अभियान चलाकर जांच कराएगा।
भूगर्भ जल प्रबंधन एवं विनियमन अधिनियम 2019 के तहत सामूहिक भूगर्भ जल उपभोक्ता (होटल, लाज, निजी आवासीय भवन, आवासीय कालोनी, मॉल्स, वाटर पार्क आदि) को भूजल के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त भूगर्भ कूप निर्माण की समस्त ड्रिलिंग संस्थाओं का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इस अधिनियम की धारा-39 के अन्तर्गत बिना पंजीकरण व अनापत्ति प्रमाण पत्र के भूगर्भ जल दोहन करते पाए जाने पर व्यक्ति, समूह, संस्था को दो से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना अथवा छह माह से एक वर्ष तक का कारावास हो सकता है।
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पांच हजार रुपये है शुल्क
भूगर्भ जलदोहन के लिए पांच साल की एनओसी दी जाएगी। इसका शुल्क भी पांच हजार रुपये है। भूगर्भ विभाग के वेब पोर्टल http://upgwdonline.in पर ऑनलाइन आवेदन कर पंजीकरण, अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं।
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वर्जन
यदि किसी व्यक्ति, फर्म, संस्था की ओर से भूगर्भ जल दोहन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र/पंजीकरण कराना जरूरी है। सभी के लिए सार्वजनिक रूप से नोटिस जारी किया गया है। एक माह के अंदर आवेदन नहीं किया जाता है तो उसके बाद अवैध रूप से भूजल दोहन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- विश्वजीत सिंह, अधिशासी अभियंता, जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद
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जमकर हो रहा भूगर्भ जलदोहन...122 होटल व बैंक्वेट हाल को नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शहर में जमकर भूगर्भ जल दोहन हो रहा है। यदि ऐसा होता रहा तो आने वाले समय में बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं। इसी के चलते बिना एनओसी लिए भूगर्भ जल का दोहन करने वाले 122 होटल और बैंक्वेट हाॅल संचालकों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नोटिस जारी किया जा चुका है।
गली-गली में आरओ प्लांट लगाकर पानी बेचने वाले भूगर्भ का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं। फिल्टर के लिए लगी मशीन जितना पानी उपयोग के लिए शुद्ध करती है, उससे दो गुना नालियों में बहा दिया जाता है। प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, भूगर्भ जल अधिनियम 2019 के तहत कृषि और घरेलू प्रयोग को छोड़कर सभी प्रकार की संस्थाओं को भूगर्भ जल विभाग की ओर से एनओसी लेने का नियम है। ऐसे संचालकों को बोरवेल बंद करके नगर निगम के पानी का इस्तेमाल करना होगा।
इस समय पादरी बाजार, शाहपुर, रुस्तमपुर, मोहद्दीपुर, हुमायूंपुर, बिछिया, आजाद चौक आदि इलाकों में 10 से 15 आरओ प्लांट लगे हुए हैं। यहां से औसतन तीन से चार लाख लीटर पानी रोजाना बर्बाद हो रहा है।
अत्यधिक दोहन का दुष्प्रभाव सेहत पर भी
उप्र भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) कानून 2019 के तहत कृषि एवं घरेलू उपयोग के लिए भूजल दोहन की छूट है। लेकिन इस कानून की आड़ में कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान व संस्थान भूगर्भ जल का अत्यधिक दोहन करते हैं। इसका दुष्परिणाम यह है कि जलस्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। पानी की बर्बादी से कई इलाकों में जल संकट भी खड़ा हो रहा है। भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन का दुष्प्रभाव लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है।
वर्जन
एनजीटी में आरपी बनाम केंद्रीय भूगर्भ जल आयोग का केस चल रहा है। कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम से भूगर्भ जल का व्यावसायिक उपयोग करने वाली संस्थाओं, होटल-रेस्टोरेंट की सूची मांगी गई थी। सूची के आधार पर एनओसी नहीं लेने वालों को नोटिस दिया गया था। एनजीटी के समक्ष सभी को अपना पक्ष रखना है।
- अनिल कुमार शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड